पुलिस का आरोप, इस दोहरे हत्याकांड में सिविल कोर्ट के वकील संतलाल वर्मा की थी साजिश
लखीमपुर खीरी। सिविल कोर्ट में वकालत करने वाले संत लाल वर्मा की जमानत याचिका सुनवाई के बाद द्वितीय अपर जिला जज मोहन कुमार ने जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रमा रमन सैनी ने बताया कि 21 जनवरी 2019 को रामापुर में रहने वाले दो किशोर नीतीश उर्फ छोटू व अंकित की हत्या हुई थी। पुलिस ने तफ्तीश के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
पुलिस का आरोप है कि इस दोहरे हत्याकांड में सिविल कोर्ट के वकील संतलाल वर्मा की साजिश थी। मामले की रिपोर्ट नितीश उर्फ छोटू के पिता राजेंद्र प्रसाद ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की तफ्तीश के दौरान ही राजेंद्र प्रसाद ने शपथ पत्र देते हुए संतलाल वर्मा को निर्दोष बताया था।
अदालती सुनवाई के दौरान राजेंद्र प्रसाद और उत्तम कुमार ने शपथ पत्र देते हुए बताया कि दोनों किशोरों की हत्या में वकील संत लाल वर्मा कि कहीं कोई भूमिका नहीं है। मगर अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी संत लाल वर्मा की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
धरा रह गया हाईकोर्ट का आदेश
पीड़ित राजेंद्र प्रसाद की ओर से पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए अदालत में 164 सीआरपीसी के बयान अंकित कराने की अर्जी दी थी। बाद में राजेंद्र प्रसाद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसकी सुनवाई के बाद 26 मई को हाईकोर्ट ने 164 सीआरपीसी के बयान दर्ज कराने के लिए खीरी पुलिस को आदेशित किया था, लेकिन अदालती आदेश पर पीड़ित के बयान दर्ज कराए जाते इससे पहले ही वकील की गिरफ्तारी हो गई थी। लिहाजा हाईकोर्ट का आदेश धरा रह गया और पीड़ित के 164 सीआरपीसी के बयान नहीं हो सके।