लखीमपुर खीरी। जनपद में सरकारी धान खरीद 31 जनवरी को बंद हो चुकी है, जिससे खाद्य एवं रसद विभाग ने खरीद की रैंकिंंग लिस्ट जारी की है। इसके मुताबिक सरकारी धान खरीद में मंडल के जनपदों में खीरी सबसे पीछे रह गया। लक्ष्य के सापेक्ष 72.74 प्रतिशत धान खरीदा गया है, जबकि मंडल के अन्य जनपदों में करीब 90 प्रतिशत से अधिक धान खरीद हुई है। प्रदेश स्तर की रेटिंग में भी खीरी की स्थिति सबसे खराब आई हैं, क्योंकि सबसे फिसड्डी सात जनपदों में खीरी सातवें स्थान पर है।
खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में प्रदेश के जनपदों को दो भागों पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश में विभाजित कर धान खरीद कराई गई थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लखनऊ मंडल के जनपदों में शामिल खीरी में एक अक्तूबर 2021 से धान खरीद शुरू हुई थी, जिसके लिए 155 क्रय केंद्र खोले गए थे। धान खरीद के लक्ष्य 2,65,300 के सापेक्ष 1,94,444.28 मीट्रिक टन धान खरीद हुई है, जो लक्ष्य का कुल 72.74 प्रतिशत है। पिछले वर्ष लक्ष्य के सापेक्ष 76.16 प्रतिशत (2,55,294 मीट्रिक टन) धान खरीदा गया था।
लखनऊ मंडल के अन्य जनपदों सीतापुर में लक्ष्य के सापेक्ष 90.83 प्रतिशत और हरदोई में 97.71 प्रतिशत धान खरीद हुई है। उन्नाव में लक्ष्य के सापेक्ष 109.75 प्रतिशत, रायबरेली में 98.36 प्रतिशत और लखनऊ में 82.84 प्रतिशत धान खरीदा गया है। धान खरीद के सबसे फिसड्डी जनपदों में शुमार जिलों आगरा में 59.70 प्रतिशत, जालौन में 32.26 प्रतिशत, झांसी में 54.63 प्रतिशत, बागपत में 5.60 प्रतिशत, कुशीनगर में 68.44 प्रतिशत, चित्रकूट में 59.58 प्रतिशत धान खरीद हुई है। इन छह फिसड्डी जनपदों के बाद खीरी की रैंकिंग ऊपर आती है।
कोरोना काल से पहले धान उत्पादन में खीरी मंडल में टॉप थ्री तक पहुंच चुका है। धान खरीद लक्ष्य के सापेक्ष कम रह जाने के पीछे धान उत्पादन में कमी आना प्रमुख वजह बताई जा रही है, क्योंकि अक्तूबर 2021 में बेमौसम बारिश से तराई की तहसीलों पलिया, निघासन, धौरहरा, लखीमपुर, गोला क्षेत्र में हजारों हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की फसल नष्ट हुई थी।
पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार धान खरीद कम हुई है, जिसकी प्रमुख वजह उत्पादन कम होना है। अक्तूबर में बाढ़ के कारण धान की फसल बड़े पैमाने पर नष्ट होने से क्रय केंद्रों पर धान की आवक कम रही। इस कारण मंडल व प्रदेश की रैंकिंग में खीरी पिछड़ गया है।
लालमणि पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी