साफसुथरी हुई जांच तो जिले का बड़ा घोटाला आ सकता है सामने
तहसीलदार बोले, नहीं बख्शे जाएंगे फर्जीवाड़ा करने वाले लोग
बिना जमीन गेहूं बिक्री का 30 लाख रुपया खाते में आने का मामला
निघासन। बिना जमीन गेहूं की बिक्री का करीब 30 लाख रुपया खाते में आने की जांच तहसीलदार ने शुरू की है। यदि इस मामले की साफसुथरी जांच की गई तो न सिर्फ जिले का बड़ा घोटाला सामने आ सकता है, बल्कि खाद्यान रैकेट का भी खुलासा संभव है। इसके अलावा फर्जी खाता खोलने वाले बैंक कर्मचारियों समेत कई अन्य विभागों के अधिकारी भी नपेंगे।
तहसील के गांव गौरिया निवासी मिथलेश, अमीना, वकीला, साबिरा आदि ने बताया कि उनके नाम एक बिसुआ भी जमीन नहीं है। बिना गए जिला सहकारी बैंक की तिकुनिया शाखा में उनके खाते खुल गए। चारों के खाते में करीब 30 लाख रुपये आए और निकल भी गए। इस बात की भनक उन्हें उस समय हुई जब वह गरीबी रेखा के ऊपर आ गए और सप्लाई विभाग ने उनके राशन कार्ड निरस्त कर दिए।
तहसीलदार राकेश पाठक ने बताया कि बिना व्यक्ति के आए बैंक में खाता कैसे खुल गया। इन सब बिंदुओं पर जांच शुरू की गई है। जांच में यह भी पता चला है कि एक छुटभैया नेता ने खाता खुलवाकर रकम की हेराफेरी की है। इसके अलावा गौरिया में दो दर्जन से अधिक लोगों के खाते खोले गए हैं। इसमें कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्होंने खाता खुलवाया और चंद पैसों के लालच में पैसा भी निकलवाया है, लेकिन उनके नाम जमीन बिसुआ भर भी नहीं है।
बाढ़ राहत चेक घोटाला भी चर्चा में
वर्ष 2009 में बाढ़ राहत के नाम पर मृतकों के नाम खाता खोलकर फसल का मुआवजा निकाल लिया गया था। इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार समेत आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में चार आरोपी जेल भी गए थे।
मामले की जांच की जा रही है। गौरिया में जिन महिलाओं के नाम पैसा निकाला गया है उनकी लिस्ट निकलवाई जा रही है। उनके नाम भूमि है या नहीं है। इस बात की भी जांच हो रही है। जांच होने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश पाठक, तहसीलदार
मेरी बैंक में आईडी देखकर खाता खोला गया था। यदि खाते में कोई गड़बड़ी हुई है तो जांच कर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
- कृपाशंकर राणा, मैनेजर तिकुनियां