लखीमपुर खीरी। संघ और राज्य की लोक सेवा परीक्षाओं में हिंदी माध्यम में परीक्षा देने और विषय के रूप में हिंदी भाषा के चयन का विकल्प है। फिर भी प्रतियोगी छात्र-छात्राओं का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हिंदी को और महत्व दिया जाना चाहिए। ऐसा अधिकारियों का भी मानना है।
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हिंदी भाषा ही नहीं संस्कार है, जो मुझे बचपन से ही अपनी मां से मिला है। वैज्ञानिक भाषा होने के नाते सूचना प्रौद्योगिकी के युग में भी यह विस्तार पा रही है। हिंदी का एक एक शब्द वैज्ञानिक तरीके से ईजाद होता है। हिंदी समृद्ध होगी तो संस्कृति समृद्ध होगी। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अनिवार्य प्रश्न पत्र अच्छी बात है।
-डॉ अरुण कुमार सिंह, एसडीएम सदर
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के तहत संघ की राजभाषा हिंदी है। मुख्य रूप से हिंदी भाषी राष्ट्र होने के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी के महत्व को नकारा नहीं जा सकता है। बात करें उत्तर प्रदेश लोक सेवा की तो यह प्रांत मुख्य रूप से हिंदी भाषी है तो आमजन की भाषा हिंदी है और शासकीय भाषा भी हिंदी है। अत: हिंदी इस प्रांत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए संघ व राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हिंदी अत्यंत महत्वपूर्ण है।।
-पूजा यादव, एसडीएम
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हिंदी हमारी श्वांस है। मगर इस पर थोड़ी सी दृष्टि भी आवश्यक है। हमारी उत्तर पुस्तिका जांचने वाले परीक्षक अगर हिन्दी माध्यम और अंग्रेजी माध्यम के अलग अलग हों तो हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों के प्रति भेदभाव नहीं हो पाएगा और भाषा का अपना संस्कार बरकरार रहेगा।
-राजेश गुप्ता, अभ्यर्थी
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राज्य लोक सेवा में प्रदेश में जहां हिंदी का अनिवार्य प्रश्न पत्र है। वहीं संघीय स्तर पर इसका लोप है। लोकतांत्रिक देश में हिंदी प्रमुख भाषा है और हिंदी छात्रों का बड़ा वर्ग है। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अंग्रेजी का प्रभाव ज्यादा है। इसमें सुधार की आवश्यकता है।
-सुयश मिश्र, अभ्यर्थी शोध छात्र, इलाहाबाद विवि