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वन्यजीवों के लिए जानलेवा हुई जंगल में वाहनों की तेज रफ्तार

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दुधवा के बफर जोन में घूमते बाघ। (फाइल फोटो)
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दुधवा टाइगर रिजर्व कोर जोन और बफर जोन में हैं कई व्यस्त सड़कें
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जंगल के अंदर भी निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करते वाहन चालक

लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल से होकर गुजरने वाले तेज रफ्तार वाहन बाघ, तेंदुओं समेत दुर्लभ वन्यजीवों के लिए मौत का कारण बनते जा रहे हैं। हालांकि जंगल से गुजरते वक्त वाहनों की गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा तय है, जिसका वाहन चालक पालन नहीं करते। इस कारण आए दिन वाहनों से टकराकर वन्यजीवों की मौत हो रही है।
रविवार को दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के मैलानी रेंज की भरिगवां और महुरेना बीट जंगल के बीच से गुजरने वाले गोला-खुटार हाईवे पर किसी वाहन की चपेट में आकर एक बाघ के मादा शावक की मौत हो गई थी। शव के पोस्टमार्टम में बाघ शावक की मौत सड़क हादसे में होने की पुष्टि हुई है। जंगल से होकर गुजरने वाली सड़कों पर कहीं बैरियर भी नहीं हैं। न ही गति सीमा नियंत्रण का कोई साधन है। इन सड़कों पर रात दिन वाहन तेज रफ्तार से फर्राटा भरते हैं। हर साल वाहनों की तेज रफ्तार वाहन वन्यजीवों की जान ले रही है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल से होकर कई सड़कें हैं जिनपर हल्के से भारी वाहन गुजरते हैं। इनमें मैलानी-भीरा रोड, पलिया-गौरीफंटा रोड, पलिया चंदनचौकी रोड दुधवा टाइगर रिजर्व के कोर जोन से होकर गुजरती हैं। गोला-खुटार हाईवे, भीरा-कुकरा, कुकरा गोला जैसी हर समय व्यस्त रहने वाली सड़कें दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन से होकर गुजरती हैं। जिनपर दिन रात वाहनों का आवागमन रहता है। इसी तरह रेलवे लाइन भी दुधवा टाइगर रिजर्व के कोर जोन से होकर गुजरती है। रेलवे भी गति सीमा का पालन नहीं कर रहा है।

सड़क हादसों में बाघ और अन्य वन्यजीवों की मौत की प्रमुख घटनाएं

  • 1997-किशनपुर सेंक्चुरी में सड़क पार करते समय वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत
  • 2011-पुवायां रेंज में सड़क हादसे में बाघ की मौत।
  • 2011-भीरा पलिया रोड पर सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिन बाद मिला।
  • 2011-भीरा खुटार पर वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
  • 2012-मैलानी रेंज के महुरेना जंगल में सड़क हादसे मे बाघ की मौत शव कई दिन बाद मिला।
  • 2012-किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर बाघिन की मौत
  • 18 जनवरी 2015- किशनपुर सैक्चुरी की मैलानी भीरा रोड पर कुरियानी के पास वाहन की चपेट में नर तेंदुए की मौत।
  • 18 अगस्त 2017-कर्तनियाघाट में गोड़ा मैलानी रेल लाइन पर ट्रेन की चपेट में आकर बाघिन की मौत।
  • 24 जनवरी 2018-किशनपुर सेँक्चुरी की मैलानी भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
  • 02 दिसंबंर 2018-मैलानी भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
  • 10 जुलाई 2020-दुधवा में वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।

जंगल के रास्तों पर गुजरने वाले वाहनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित है। इससे अधिक रफ्तार से वाहन चलाने पर वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। दुर्घटना में वन्यजीवों की मौत होने पर कठोर दंड का प्रावधान है। इस नियम को कड़ाई से लागू किया जाएगा। - संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व

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