लखीमपुर खीरी। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ साथ सरकार प्राकृतिक विरासत को सहेजने के प्रति गंभीर हुई है। प्रदेश सरकार ऐसे पुराने वृक्षों को खोजकर उन्हें संरक्षित करने का अभियान चला रही है। जो वृक्ष 100 वर्ष या उससे अधिक आयु पूरी कर चुके हैं उनको इस श्रेणी में रखा जा रहा है। जिले में अब तक ऐसे 42 बूढ़े पेड़ खोजे जा चुके हैं। इन पेड़ों को हेरिटेज ट्री का दर्जा दिया गया है। इनमें कई पेड़ ऐसे हैं जिनकी उम्र 400 से 500 साल तक है।
राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के तहत पुराने पेड़ों को खोजकर उन्हें प्राकृतिक विरासत के रूप में संरक्षित करने का अभियान 2019 में शुरू किया था। इन वृद्ध वृक्षों की खोज की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई थी। खीरी जिले में अब तक ऐसे 42 पेड़ खोजे जा चुके हैं जिनकी आयु 100 वर्ष से अधिक हो चुकी है। इन्हें हेरिटेज ट्री का दर्जा दिया गया है। इनमें से अधिकतर ऐसे पेड़ हैं जिनका किसी न किसी धार्मिक मान्यता से जुड़ाव रहा है। कई पेड़ों की स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ पूजा भी करते हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में झादी झील के पास करीब पांच सौ साल पुराना बरगद का विशाल पेड़ हैं। यह पेड़ झादी बाबा के नाम से प्रसिद्ध है। दुधवा नेशनल पार्क बनने के पहले तक यहां मेला भी लगा करता था। बेलरायां रेंज के किला क्षेत्र में पाकड़ का पेड़ और भादी ताल क्षेत्र में कई पुराने पेड़ हैं जिनकी आयु भी दो सौ साल से ज्यादा आंकी जा रही है।
सठियाना रेंज में एक पाकड़ और एक बरगद का पुराना पेड़ खोजा गया है। दक्षिण सोनारीपुर रेंज में दो पीपल, एक बरगद, दो पाकड़ और दो आम के पुराने पेड़ मिले है जिनकी आयु करीब 200 वर्ष से भी अधिक है। दुधवा के सौनहा बीट में 100 साल से अधिक आयु का कुसुम का पेड़ है, जबकि कर्तनिया घाट के ककरहा रेंज परिसर में लगा साल का पेड़ 300 साल से भी अधिक पुराना है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में तीन बूढ़े पेड़ खोजे गए हैं। इनमें मैलानी रेंज की खरेहटा बीट में बरगद, उत्तर निघासन रेंज के सुल्तानपुर में बरगद और दक्षिण निघासन के लालबोझी गांव में पीपल के पेड़ मिले हैं, जो 100 साल से अधिक उम्र के हैं। सबसे ज्यादा हैरिटेज ट्री दक्षिण खीरी वन प्रभाग में खोजे गए हैं। यहां अब तक 28 पुराने पेड़ खोजे जा चुके हैं। इनमें सबसे बूढ़ा पेड़ मोहम्मदी रेंज के बेलहरी गांव में मिला है। पीपल के इस पेड़ की उम्र 400 साल से भी अधिक है। लोगों की मान्यता है कि इस पेड़ पर ब्रह्मबाबा का वास है। इस पेड़ के पास ही बेलहरी देवी का मंदिर है। इसी रेंज के किरतापुर गांव में 400 साल पुराना बरगद का पेड़ भी मिला है।
सरकार की मंशा केवल विरासत मूल्य के ऐसे वृक्षों की खोज करना ही नहीं बल्कि उन्हें अच्छी तरह से संरक्षित करना भी है। हाल ही में खीरी कस्बे में पुलिस चौकी परिसर में लगे पुराने बरगद के पेड़ को हैरिटेज ट्री घोषित किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के कारण लोग पीपल, बरगद और पाकड़ के पेड़ नहीं काटते है। इससे इन वृक्षों को लंबी उम्र तक जीने का मौका मिल सका है। इन पर अध्ययन भी हो रहा है। संवाद
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जिले में अब तक 42 हेरिटेज पेड़ों की खोज की जा चुकी है। इनमें 28 पेड़ दक्षिण खीरी वन प्रभाग में, तीन पेड़ दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में और 11 पेड़ दुधवा नेशनल पार्क और कर्तनिया घाट में हैं। 100 साल से अधिक आयु के इन पेड़ों को हैरिटेज ट्री घोषित किया गया है। इनके संरक्षण के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
-समीर कुमार, डीएफओ दक्षिण खीरी वन प्रभाग