लखीमपुर खीरी में कटान की जद में आया एक घर। संवाद
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लखीमपुर खीरी। जिले में बहने वाली शारदा, घाघरा, मोहाना, कर्णाली और सुहेली नदियों की विनाशलीला किसानों को गहरे जख्म दे रहीं हैं। अब तक यह नदियां सैकड़ों परिवारों को बेघर और भूमिहीन बना चुकी हैं। कई ऐसे लोग जो बड़ी जमीनों के जोतकार थे अब वह भूमिहीन होकर दूसरे के खेतों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। इस साल भी नदियों ने जो तबाही मचाई है उसके जख्म भरने में लंबा समय लग सकता है।
इस साल नदियों में आई बाढ़ से अब तक 183 गांवों के 30433 लोग प्रभावित हुए हैं। धौरहरा क्षेत्र में तो बाछेपारा नामक एक गांव का वजूद ही मिट गया। कई गांवों में कटान जारी है तो कुछ कटान की जद में।
कट चुके गांवों के लोग सड़कों और तटबंधों के किनारे तिरपाल तान कर रहने को मजबूर हैं। उनके सामने रोजी रोटी का संकट ही नहीं पेट भरने तक की समस्या है। कड़ी धूप और बारिश के थपेड़े झेलते हुए कटान पीड़ित परिवार सरकारी मदद की आस में हैं।
मौजूदा समय में भी जिले के 15 ऐसे गांव हैं जहां रास्तों पर पानी भरा होने के कारण उनका संपर्क अन्य जगहों से कटा हुआ है जहां राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। जिले में बाढ़ से 10342.94 हेक्टेयर क्षेत्रफल बाढ़ से प्रभावित हुआ है। इसमें 9383.31 हेक्टेयर कृषि भूमि शामिल है। इस जमीन पर बोई गई फसल पानी में डूब कर खराब हो चुकी है। यहीं नहीं करीब 500 हेक्टेयर कृषि भूमि फसल समेत कटकर नदियों में समा चुकी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल बाढ़ और कटान से अब तक 1399.47 लाख रुपये मूल्य की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। 90 पक्के मकान और और 101 झोपड़ियां नष्ट हुई हैं। इस तरह करीब इसी साल करीब 200 परिवार बेघर हो चुके हैं। नदियों की विनाशलीला अब तक जारी है। नदियों का जलस्तर घटने के बाद भूकटान तेजी से बढ़ा है। इसके चलते बाढ़ कटान प्रभावित गांवों के लोगों की मुसीबतें कम नहीं हो रहीं हैं।
राहत और बचाव के लिए प्रशासन ने किए ये इंतजाम
बाढ़ से बचाव और राहत के लिए जिला प्रशासन ने 38 बाढ़ चौकियां बनाई हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री प्रभावित लोगों तक पहुंचाने के लिए 890 नावों का इंतजाम किया गया है। दो पीएसी टीमें लगाई गई हैं तो 38 मेडिकल टीमें। अब तक 5420 अनाज किट वितरित की जा चुकी हैं। 28815 लोगों मीटर त्रिपाल विस्थापित परिवारों को बांटे जा चुके हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उपचार के लिए 30 मेडिकल टीमें बनाई गई हैं। संवाद