पलियाकलां। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और बनबसा बैराज से पानी छोड़े जाने का असर अब शारदा नदी पर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। नदी खतरे के निशान से 80 सेमी ऊपर पहुंच गई है। जिसके कारण निचले इलाकों के कई गांवों में बाढ़ के पानी ने दस्तक दे दी है। इतना ही नहीं शहर की चीनी मिल रोड पर आरपार पानी चलने लगा है। नगला रोड पर तो तीन फुट पानी भरा हुआ है। जिसके चलते लोगों को काफी दिक्कत हो रही है।
बनबसा बैराज से पानी रिलीज किए जाने के अलावा पहाड़ों पर हो रही बरसात से शारदा नदी का जलस्तर बुधवार से ही बढ़ने लगा था। नदी लगातार बढ़ी और बृहस्पतिवार को नदी का पानी सड़क व निचले इलाके के ग्रामीणों के घरों में घुसने लगा। जल आयोग के राकेश कुमार ने बताया कि गुरुवार को शाम चार बजे नदी का जलस्तर खतरे के निशान 154.100 सेमी से 80 सेमी ऊपर 154.900 सेमी पर बह रहा था। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद शहर की चीनी मिल रोड पर रिलायंस पेट्रोल पंप के आगे से अतरिया क्रॉसिंग के पहले तक आरपार पानी चलने लगा। नगला रोड पर भी हाल बेहाल है यहां पर तीन फुट तक पानी चल रहा है।
इन गांवों में बाढ़ के पानी ने दी दस्तक
बाढ़ के पानी ने आजादनगर, बर्बादनगर, मेलाघाट आदि गांवों में दस्तक दे दी है। बाढ़ का पानी शारदा नदी के किनारे बसे श्रीनगर गांव की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके अलावा नगला, मटैहिया, दौलतापुर आदि गांवों के रास्तों पर पानी चल रहा है।
रेलवे लाइन के किनारे पहुंचा नदी का पानी
दौलतापुर गांव की स्थिति काफी खराब है यहां करीब 12 साल बाद रेलवे लाइन के किनारे बाढ़ का पानी पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे लाइन का इलाका काफी ऊंचा है और सन 2008 में इसके पास पानी पहुंचा था।
सन 2008 की याद हुई ताजा
शहर की चीनी मिल के पास तेज धार से रोड क्रास कर रहा शारदा नदी की बाढ़ का पानी देखकर लोगों को सन 2008 की बाढ़ याद आ रही है। सन 2008 शहर में ऐसा कोई मोहल्ला व गली नहीं थी जहां पर बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा था। लगभग तीन-चार फुट तक पानी सड़क पर चल रहा था।
दुकानदारों में मचा हड़कंप
शहर की चीनी मिल रोड पर पानी आने के बाद निचले इलाकों में स्थित दुकानों के मालिकों में अफरातफरी है। रिलायंस पेट्रोल पंप के पास तो दुकानों के सामने दो फुट तक पानी भर गया है।
कुंवरपुर कलां के रपटा पुल पर चलने लगा पानी
मझगईं इलाके के कुंवरपुर कलां के रपटा पुल पर बाढ़ का पानी चलने लगा है। कुंवरपुर कलां, खैराना तथा खालेपुरवा जाने का यही एकमात्र रास्ता है। इस पर भी बाढ़ का पानी चलने से ग्रामीणों में अफरातफरी का माहौल बना हुआ है।