सड़क किनारे घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
- फोटो : अमर उजाला
बाढ़ग्रस्त गांवों में कराई गई मुनादी
प्रशासन ने सबसे पहले बाढ़ प्रभावित होने वाले गोविंदनगर व भानपुरी खजुरिया में डुग्गी पिटवाकर गांव को खाली करने की अपील की। लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा गया। देर शाम छह बजे से पहले ही पूरा गांव खाली करने की अपील की गई। जिसके बाद ग्रामीण अपना-अपना सामान लेकर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के लिए जाते दिखे। अतरिया गांव में भी एनाउंस कर पलिया-भीरा मार्ग से आवागमन न करने की अपील की गई।
अभी बनाया और फिर उजाड़ना पड़ा आशियाना
पलिया-भीरा मार्ग पर अतरिया गांव के ग्रामीणों को हर साल संकट झेलना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो इनको सरकारी इमदाद मिलती है और न ही लंच पैकेट दिए जाते हैं। पीड़ितों ने बताया कि हर बार पानी का जलस्तर बढ़ने से उनके घरों में दो से तीन फुट पानी भर जाता है। रेलवे लाइन कटने से धार सीधी सड़क पर आती है और सड़क किनारे रहने के कारण बाढ़ का पानी हर बार उनके आशियानों को तोड़ता है। हर बार वह जी-तोड़ मेहनत कर अपना आशियाना बनाते हैं और फिर नुकसान झेलना पड़ता है।
एसडीएम पलिया कार्तिकेय सिंह ने कहा कि बनबसा बैराज से चार लाख से अधिक क्यूसेक पानी पास किए जाने के बाद गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। तहसीलदार के साथ ही लेखपालों की टीमों को लगाया गया है। प्रत्येक बाढ़ प्रभावित गांवों में नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए प्रचार किया जा रहा है, ताकि वह ऊंचे स्थानों पर पहुंचे।