लखीमपुर खीरी। मायके में रह रही पत्नी और साले को ससुराल में घुसकर निर्ममता से मौत के घाट उतार देने के मामले में एडीजे श्यामलाल कोरी ने उसके पति व पुत्र सहित तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही तीनों पर जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी प्रमोद सिंह ने बताया कि खीरी थाना क्षेत्र के ग्राम इकबालपुर निवासी सियाराम की शादी थाना क्षेत्र के ही ग्राम बनिका निवासी महराजा के साथ हुई थी। शादी के दशकों बाद जब बच्चे भी बड़े हो चुके थे, तब भी आए दिन मारपीट व झगड़ा होता था। इसी झगड़े और मारपीट से नाराज हो महराजा जुलाई 2012 में मायके चली गई थी। इसी बीच 18/19 सितंबर 2012 की रात को सियाराम ने अपने पुत्र रमेश व भतीजे रामहेत के साथ अपनी ससुराल ग्राम बनिका में धावा बोल दिया था। दरवाजा खुलवाने के साथ ही पहले साले साहब दीन पर टूट पड़ा, जब दूसरे साले प्रहलाद ने बचाने की कोशिश की तो उसे भी चाकू लेकर दौड़ा लिया, छत पर प्रहलाद को पकड़कर उसके पेट में चाकू घोंपकर मरणासन्न कर दिया। इसके बाद सियाराम ने अपनी पत्नी महराजा को चाकुओं से ताबड़तोड़ प्रहार करते हुए मरणासन्न कर दिया।
इसके बाद हमलावर प्रहलाद को मरा समझकर भाग निकले, तब परिवार वाले जिला अस्पताल लाए, लेकिन वहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। हालांकि दूसरे साले साहबदीन के हल्की चोटें थीं, तो उसे पट्टी बांधकर घर भेज दिया गया। इस मामले में साहबदीन ने अपने बहनोई सियाराम, भांजे रमेश व भतीजे रामहेत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, अदालती सुनवाई के दौरान एडीजीसी पीके सिंह ने साहबदीन, रामजी, रामकुमार, जनमेजय सचान, एचसीपी राजकुमार यादव, डा. अमित सिंह, एसआई मनोज यादव, एसके सिंह व रामगोपाल वर्मा की गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने तीनों हत्यारोपियों को दोषसिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही सभी पर 41-41 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।