लखीमपुर खीरी। अध्यात्म और साधू संगत में पति को पड़ता देखकर उसकी पत्नी ने मायके का रुख किया था। कई बार मान मनौव्वल और समझौता के प्रयास के बावजूद पत्नी महराजा अपनी ससुराल लौटने को राजी नहीं थी, तो वहीं पति को नामर्दी के ताने भी सुनने पड़ रहे थे। जब जोर जबरदस्ती से पत्नी को ससुराल लाने की कोशिश की तो सियाराम के सालों ने उसे चुनौती दे दी।
सियाराम के घरवालों के मुताबिक बच्चे बड़े हो जाने के बाद सियाराम ने दीन दुनिया से नाता छोड़ दिया था। वह साधू संतों के साथ रहने लगा था, यह देखकर उसकी अपनी पत्नी महाराजा ने अक्सर मायके जाना शुरू कर दिया था। बताते हैं कि ग्राम बनिका में महराजा की एक ट्रक ड्राइवर से नजदीकियां बढ़ने की चर्चाएं होने लगी थीं, जिससे सियाराम के घरवाले शर्मिंदगी महसूस करते थे। बच्चे भी बड़े थे और सब बातें समझने लगे थे।
सियाराम के घरवालों के मुताबिक, महाराजा अपना बक्सा और कीमती सामान लेकर अपने मायके चली गई थी। उसने अपने बच्चों की भी नहीं सुनी थी। गांव इकबालपुर में सियाराम को नामर्दी के ताने अब सताने लगे थे। लिहाजा सियाराम अपनी महाराजा को बलपूर्वक अपने साथ ले जाने की बात कहने लगा था। इसी बात को लेकर सियाराम और उसके ससुरालीजनों के बीच गंभीर मारपीट हुई थी, जिसमें सियाराम के साले ने बांका मारकर उसको गंभीर रुप से जख्मी कर दिया था। इसके बाद थाने पंचायत में रिश्तेदारों ने सुलह तो करा दी, लेकिन रिश्ते में दुश्मनी की दरार पड़ती चली गई। यही कारण था कि 18/19 सितंबर की रात को अपनी पत्नी और साले को सबक सिखाने के इरादे से सियाराम अपने लड़के रमेश और भतीजे रामहेत के साथ गांव बनिका पहुंचा था।
उस रात को यादकर अब भी
भयभीत हो जाते हैं ग्रामीण
18/19 सितंबर 2012 की मनहूस रात को यादकर अभी भी गांव बनिका के लोग भयभीत हो जाते हैं, जब गांव के जमाई सियाराम ने न सिर्फ अपनी ससुराल पहुंचकर अपनी पत्नी महराजा पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया, बल्कि बचाने आए साले प्रहलाद की भी पेट फाड़कर हत्या कर दी थी।
हमारा तो सबकुछ बर्बाद हो गया
इस दोहरे हत्याकांड में अपनी बहन महराजा और भाई प्रहलाद की जान खोने वाले साहबदीन ने जब अदालती फैसले की खबर सुनी तो उसकी आंखें आंसुओं से डबडबा गईं। बताने लगा कि हमारा तो सबकुछ बर्बाद हो गया है, उसे ईश्वर पर पूरा भरोसा था कि इंसाफ जरूर मिलेगा। आज उसकी बहन और भाई की आत्मा को शांति मिली होगी।