लखीमपुर खीरी। विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में पूरे दमखम से मैदान में उतरने वाली बहुजन समाज पार्टी इस विधानसभा चुनाव में काफी खामोश नजर आ रही है। बसपा ने न कोई विधानसभा प्रभारी बनाए हैं न ही टिकट के किसी दावेदार का नाम खोल रही है। सब कुछ इतना गोपनीय है कि दूसरे राजनीतिक दलों को अपनी चुनावी रणनीति बनाने में भी पसीने छूट रहे हैं।
बहुजन समाज पार्टी विधानसभा चुनावों के पहले प्रत्येक विधानसभा सीट पर अपने प्रभारी नियुक्त करती थी। यह प्रभारी दो तीन साल अपने क्षेत्र में रहकर काम करते थे। चुनाव के समय इन्हीं प्रभारियों को उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता था। इस बार बसपा ने किसी भी विधानसभा क्षेत्र में अपना प्रभारी नहीं बनाया है। इससे दावेदारों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। इस समय जब भाजपा, सपा और कांग्रेस टिकट के दावेदार अपनी फील्ड बनाने में जुटे हुए हैं, वहीं बसपा पूरी तरह खामोश रहकर अन्य दलों के दांवपेंच पर नजर बनाए हुए है।
विधानसभा चुनाव से पहले ही विभिन्न दलों से टिकट के दावेदारों ने बैनर, होर्डिंग्स और पोस्टरों से अपने क्षेत्रों को भर दिया है। वहीं किसी बसपा नेता की एक भी होर्डिंग शहर या गांवों में नजर नहीं आ रही है। कुछ संभावित दावेदारों ने होर्डिंग्स लगवाए जरूर हैं लेकिन उसमें कहीं भी न तो बसपा का नाम है न ही चुनाव निशान। इतना ही नहीं किसी बड़े मुद्दे पर कोई बसपा नेता अपना मुंह भी नहीं खोल रहा है। हाल ही में जिले के अंदर तिकुनिया हिंसा जैसी बड़ी घटना हुई लेकिन न तो कोई नेता किसी पीड़ित के घर पहुंचा और न ही मामले पर अपना मुंह खोला। विभिन्न दलों के नेता ही नहीं आम लोग भी बसपा की इस अप्रत्याशित चुप्पी से हैरान हैं।
समय आने पर ही अपने पत्ते खोलेगी बसपा
बसपा जिलाध्यक्ष उमाशंकर गौतम का कहना है कि बसपा जिले की आठों सीटों पर पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी। सभी सीटों पर पार्टी अपने मजबूत उम्मीदवार उतारेगी लेकिन उम्मीदवारों की घोषणा समय आने पर ही की जाएगी। बसपा में टिकट के लिए आवेदन करने की प्रथा न पहले थी न अब है। बसपा सुप्रीमो मायावती की नजर प्रदेश की सभी सीटों पर है। अभी पार्टी दूसरे दलों की रणनीति पर नजर बनाए हुए है। बसपा जिलाध्यक्ष ने दावेदारों के नाम यह कहकर बताने से इनकार कर दिया कि अभी इस संबंध कुछ भी कहने से मना किया गया है।