फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खरीद का खाता खुला नहीं, किसानों के 237 गाटा किए निरस्त

विज्ञापन
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद के लिए खोले गए क्रय केंद्र महज दिखावा साबित हो रहे हैं। चार दिनों में एक दाना धान नहीं खरीदा गया है। जबकि मंडी में आढ़तियों के फड़ पर धान की खरीद-फरोख्त शुरू हो गई है। सरकार ने 1835 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया है, जबकि आढ़ती 1400 से 1460 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद रहे हैं। ऐसे में सरकारी स्तर पर खरीद न किए जाने के कारण किसानों को घाटा हो रहा है। क्रय केंद्रों पर अभी खरीद शुरू होते भी नहीं दिख रही क्योंकि हैंडलिंग ठेकेदार ही अभी तय नहीं हुए हैं।
विज्ञापन

जिले में धान खरीद के लिए कुल 115 क्रय केंद्र खोलने को मंजूरी मिली है। अभी 50 प्रतिशत क्रय केंद्र ही खुले हैं। इनमें भी सिर्फ दिखावे के लिए बैनर टांग दिए गए हैं। जबकि क्रय केंद्रों पर हैंडलिंग ठेकेदार का चयन नहीं हुआ है। इसके अलावा क्रय केंद्रों के राइस मिलर्स से संबद्धीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। केंद्र प्रभारी और मिलर्स के बीच 282 एग्रीमेंट कराए जाने हैं, लेकिन अभी 50 प्रतिशत काम नहीं हो पाया है। राजापुर मंडी में पांच क्रय केंद्र खोले जाने हैं, जिनमें बैनर टांग कर इतिश्री कर ली है। एफसीआई के केंद्र प्रभारी ताला बंद कर नदारद मिले। मार्केटिंग, पीसीयू के क्रय केंद्रों पर भी सन्नाटा दिखा। मार्केटिंग के केंद्र प्रभारी केके पाठक का कहना है कि अभी धान में नमी ज्यादा है, 15 अक्तूबर के बाद ही मानक का धान आएगा। जबकि आढ़तियों के यहां किसानों का धान 1400 से 1460 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। नमी ज्यादा होने पर किसानों ने अपना धान फड़ पर सुखाकर आढ़तियों के हाथ बेचा। राजापुर मंडी में एक अक्तूबर से चार अक्तूबर तक 200 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज हुई है।
पिछले वर्ष धान खरीद में 12 लाख कीमत से खरीदी गई ड्रायर मशीन में एक बार भी धान सुखाया नहीं जा सका है। मंडी समिति ने इसे किसानों का धान मानक के अनुरूप बनाने के लिए खरीदा था, ताकि क्रय केंद्रों पर आसानी से धान बिक्री किया जा सके। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने इस मशीन को चालू कराने की मांग मंडी सचिव से की, लेकिन कई दिन बाद भी इसे चालू नहीं किया गया है। हालात यह है कि मशीन में जंग लगने लगी है। इससे अधिकारियों की लापरवाही उजागर हो रही है। तो वहीं किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। धान की नमी सुखाने के लिए किसान फड़ पर घंटों समय बर्बाद कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें