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आईसीयू एवं चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती दो बच्चों की मौत

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एक बच्चा एईएस से तो दूसरा बुखार से था पीड़ित
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एईएस पीड़ित पांच बच्चों का अभी चल रहा है इलाज
लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण के दौर में अब एईएस बच्चों के लिए जानलेवा बनकर सामने आया है। जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती एईएस पीड़ित नौ वर्षीय एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं चिल्ड्रन वार्ड में भी इलाज के दौरान एक आठ माह के बच्चे की मौत हो गई।
तेज बुखार आने पर मैलानी निवासी राजाराम नौ वर्षीय पुत्र आयुष को जिला अस्पताल लेकर आए। हालत गंभीर होने पर उसे चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। हालात में सुधार न होने पर उसे आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। जहां पर जांच कराने में एईएस के लक्षण मिले। दो दिन इलाज चलने के बाद बुधवार को आयुष की मौत हो गई, जबकि छह वर्षीय काजल पुत्री अवधराम निवासी भूलनपुर, 12 वर्षीय मुकुल पुत्र बबूल निवासी भुसौरिया, 10 वर्षीय मुस्कान पुत्री प्रकाश निवासी भीरा, नौ वर्षीय अंकुश पुत्र प्रेमचंद्र निवासी खरगापुर, 12 वर्षीय संजय पुत्र ठग्गू निवासी सिंगाही का अभी इलाज चल रहा है।
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अरनब को बुखार के साथ ही खून की भी कमी थी
बुधवार को इलाज के दौरान चिल्ड्रन वार्ड में बुखार पीड़ित आठ माह की अरनब पुत्री सर्वेश निवासी हैदराबाद की मौत हो गई। अरनब बुखार और खून की कमी से पीड़ित थी। उधर, बुधवार को बुखार आने पर आठ माह के कान्हा तिवारी पुत्र अमित तिवारी निवासी गंगोत्रीनगर और सात वर्षीय कान्हा पुत्र अंकित कुमार निवासी मथना भर्ती हुए।
किस तरह काम करता है एईएस का वायरस
एक्यूट इंसेफ्लाइटिस मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं, जिनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं। जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अन्य दिक्कत आ जाती है तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है। इसके वायरस शरीर में पहुंचकर खून में शामिल हो जाते हैं। जहां पर इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। खून के साथ बीमारी ये वायरस मस्तिष्क में पहुंचकर कोशिकाओं में सूजन का कारण बन शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को खराब कर देते हैं।
लक्षण
एईएस में तेज बुखार आता है। शरीर में ऐंठन होने लगती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। तेज बुखार के कारण बच्चे बेहोश तक हो जाते हैं। झटके भी आने लगते हैं। समय पर इलाज न मिलने से मौत तक हो सकती है।
बचाव
तेज बुखार होने पर शरीर को ताजे पानी से पोंछते रहें। माथे पर गीले कपड़े की पट्टी रखें ताकि बुखार कम हो सके। बच्चे के शरीर से कपड़े हटाकर गर्दन सीधी रखें। बच्चों को बिना डॉक्टर को दिखाए दवा और सीरप न दें। बेहोशी व दौरे आने पर बच्चे को बिना देर किए सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।
गर्त वर्ष 20 बच्चे मिले थे पीड़ित
एक जनवरी- 2020 से नवंबर तक एईएस पीड़ित 20 बच्चे मिले थे, जबकि दो बच्चों में जेई की पुष्टि हुई थी। इस साल अब तक 15 बच्चे एईएस पीड़ित मिले हैं, जबकि एक बच्चे में जापानी इंसेफ्लाइटिस की पुष्टि हुई है। वहीं एईएस पीड़ित एक बच्चे की मौत हुई है।
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जिला अस्पताल के आईसीयू और चिल्ड्रन वार्ड में एईएस और बुखार से दो बच्चों की मौत होने की सूचना नहीं है। सीएमएस से जानकारी करने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकता है।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ

आईसीयू वार्ड
कुल भर्ती हुए बच्चे- 19
जेई पीड़ित बच्चा- एक
एईएस पीड़ित बच्चे- 15
लखनऊ रेफर हुए- तीन

एईएस पीड़ित कुल बच्चे- 15
स्वस्थ हुए बच्चे -9
मौत- एक
वार्ड में भर्ती बच्चे- पांच
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