- पंचायत राज विभाग और जल निगम के बीच जिम्मेदारी को लेकर विवाद
- रखरखाव-संचालन के लिए एक-दूसरे पर थोप रहे आरोप
- संचालन के लिए अहम नलकूप पर आपरेटर की तैनाती नहीं हो सकी
जिले में पाइप पेयजल योजना का सुचारू रूप से संचालन नहीं हो पा रहा हैै। करोड़ों की लागत से 56 ग्राम पंचायतों में पाइप लाइन बिछाकर ओवरहेड टैंक बनाए जा चुके हैं, लेकिन इनके रखरखाव और संचालन को लेकर पेच फंसा हुआ है। इन गांवों में पाइप पेयजल योजनाएं पूरा कर ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर कार्यदायी संस्था जल निगम ने पल्ला झाड़ लिया है। जबकि ग्राम पंचायतें पाइप पेयजल योजना के संचालन में विफल साबित हो रही हैं। पंचायत राज विभाग हैंडओवर करने की तिथि से पांच वर्ष तक रखरखाव और संचालन के लिए जल निगम को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
बता दें कि सरकार हैंडपंप के बजाय पाइप पेयजल योजना पर जोर दे रही है, जिससे गांवों में लोगों के घरों में पाइप कनेक्शन के जरिये पेयजल आपूर्ति की जानी है। अब तक 56 ग्राम पंचायतों में पाइप पेयजल आपूर्ति केे लिए ओवरहेड टैंक बनाकर ग्राम पंचायतों की सुपुर्दगी में दिए जा चुके हैं। एक ओवरहेड टैंक और पाइप लाइन बिछाने पर क्षमता के अनुसार एक करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके बावजूद गांवों में पेयजल आपूर्ति निर्बाध गति से नहीं हो रही हैै, क्योंकि नलकूप संचालन के लिए आपरेटर की तैनाती नहीं हो सकी हैै। ग्राम पंचायतें इसके लिए फंड न होने की बात कह रही हैैं। पंचायत राज विभाग शासनादेश का हवाला देते हुए पांच साल तक रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था जल निगम की बता रहा है। जबकि जल निगम के अधिकारी इसके संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की बता रहे हैं। शासनादेश के बारे में तर्क है कि योजना पुरानी है और आदेश बाद में आया हैै।
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राजापुर में ठप है जलापूर्ति
शहर से सटे गांव राजापुर में पाइप पेयजल योजना मार्च 2012 में ग्राम पंचायत को हैंडओवर की गई थी। इसके बाद से संचालन की जिम्मेदारी को लेकर गतिरोध बना हुआ है। ग्रामीणों के घरों की टंकियां शोपीस बनी हुई हैै, क्योंकि जलापूर्ति ठप है। नलकूप चलाने के लिए आपरेटर की तैनाती नहीं हो सकी है। विभागीय सूत्र बताते हैैं कि सभी 56 गांवों में ऐसे ही हालात हैैं। महीने के 30 दिनों में कभी कभार दो-चार दिन ही पानी की सप्लाई होती हैै। इससे शासन की मंशा सफल नहीं हो पा रही हैै।
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इन गांवों में बन चुकी हैं टंकियां
धौरहरा ब्लाक के गांव कलुआपुर, सिसैयाकला, अमेठी, जंगलवाली, ऊचगांव, नयागांव, ईसानगर के बीरसिंगपुर, परसिया, ईसानगर, मिर्जापुर मल्लापुर, लौकाही, रूद्रपुर सालिम, बांकेगंज के ग्रंट नंबर 10, ग्रंट नंबर 11, कुुंभी के लंदनपुर ग्रंट, बिजुआ के पड़रियातुला, पल्हनापुर, भीरा, मितौली के गांव कस्ता, दतेलीकलां, कलुआमोती, लल्हौआ, निघासन के धरर्मापुर, खैरहना, निघासन, अदलाबाद, चखरा, लुधौरी, पलिया के बबौरा, भगवंतनगर, मरूआ पश्चिम, बेलाकलां, त्रिलोकपुर, कोठिया, सिंगाही खुर्द, मझगई, गदनिया, पसगवंा के मैगलगंज, रमियाबेहड़ के सुजानपुर, जंगलमटेरा, तेलियार, पढुआ, दरेरी, फूलबेहड़ के सुंदरवल, खैइया, बेलिहान, लखीमपुर के ढसरापुर, सेमरई, लकेसर, राजापुर, मनिकापुर, कैमहरा, रमुआपुर और नकहा ब्लाक के मझरा, बडग़ांव में पेयजल ओवरहेड टैंक बनाए जा चुके हैं।
ग्राम पंचायतों के पास रखरखाव और संचालन के लिए फंड नहीं है। शासनादेश के मुताबिक हैंडओवर होने के पांच साल तक कार्यदायी संस्था को संचालन करना हैै। इसके बाद ग्राम पंचायतें 50 रुपये प्रतिमाह उपभोक्ताओं से वसूल कर संचालन कराएंगी।
- सुधीर कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ
पेयजल योजनाओं में यांत्रिक या बिजली संबंधी खराबी आने पर जल निगम की यांत्रिक शाखा लखनऊ पांच साल तक रिपेयरिंग कार्य कराएगी। इसके अलावा संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की हैै, जिसके लिए उन्हें ही फंड बनाना होगा।
- विनय पाल, अधिशासी अभियंता, जल निगम