नशा मुक्त भारत अभियान के तहत चिह्नित 272 जनपदों में खीरी भी है शामिल
लखीमपुर खीरी। नशा मुक्ति अभियान के तहत 2020-21 में मिला दस लाख रुपये का बजट अब तक खर्च नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार पर रोक है। केवल व्यक्तिगत एप्रोच ही की जा रही है, जिससे बजट का इस्तेमाल नहीं हो सका है। अगर 15 अगस्त तक धनराशि खर्च नहीं हुई तो बजट सरेंडर करना पड़ सकता है।
नशा मुक्त भारत अभियान के तहत चिह्नित 272 जनपदों में लखीमपुर खीरी भी शामिल है, जहां मादक पदार्थ एवं शराब का अत्याधिक सेवन होता है। इस योजना में स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से नशे के दुष्प्रभाव एवं बुुराइयों के बारे में व नशे की रोकथाम के विषय में लोगों को जागरूक कर नशे से ग्रस्त पीड़ितों को पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। पिछले एक साल में बजट मिलने के बावजूद इस मद में एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ है।
डीएम डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया की अध्यक्षता में कुछ दिन पहले जिला स्तरीय समिति की बैठक हुई थी। इसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु कुमार ने बताया कि 2020-21 धनराशि मार्च में मिली थी। इसके बाद कोविड-19 का प्रकोप बढ़ने और पंचायत चुनाव के कारण कार्य योजना के अनुसार बजट व्यय नहीं किया जा सका। अब भारत सरकार के संयुक्त सचिव ने 15 अगस्त 2021 तक कार्य योजना अनुसार धनराशि का उपभोग करने के निर्देश दिए हैं।
इन बिंदुओं पर बनी सहमति
बैठक में कॉलेज में छात्र क्लबों के गठन, शिक्षण संस्थानों की 100 मीटर परिधि में सिगरेट, मदिरा आदि की बिक्री प्रतिबंधित करने, नशे से ग्रस्त पीड़ितों की पहचान करके उनका पुनर्वास करने, सोशल मीडिया की सहभागिता बढ़ाने, सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण देने, समुदाय के स्वयंसेवकों की पहचान करके आईडी कार्ड देकर जागरूकता फैलाने के लिए प्रशिक्षित करने की कार्ययोजना पर सहमति जताई गई।
स्कूल-कॉलेज में प्रचार-प्रसार संबंधी कार्यक्रम नहीं होंगे, बल्कि उनके स्थान पर व्यक्तिपरक उपायों द्वारा नशे से ग्रस्त व्यक्तियों का सर्वे कराकर उनकी सूची तैयार कराई जाएगी। फिर ऐसे लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा और जरूरत के मुताबिक नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया जाएगा। - सुधांशु कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी