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बाघ का मुखौटा लगाकर निकाली साइकिल रैली

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विश्व बाघ दिवस पर दुधवा मुख्यालय पर हुई गोष्ठी
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द नेचर सोसाइटी से जुड़े लोगों ने बनाई आकर्षक रंगोली
पलियाकलां। विश्व बाघ दिवस पर दुधवा मुख्यालय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें बाघ संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। इसके बाद दुधवा पार्क से मुख्यालय तक साइकिल रैली निकाली गई। मुख्यालय से एफडी ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। साइकिल सवार बाघ का मुखौटा लगाए हुए थे और लोगों को बाघ संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे थे।
विश्व बाघ दिवस पर दुधवा नेशनल पार्क के पलिया मुख्यालय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें एफडी संजय पाठक ने कहा कि विश्व में बाघों के मामले में भारत में सबसे अधिक बाघ पाए जाते हैं, लेकिन जंगली हिस्सा कम हो रहा है और आबादी बढ़ रही है। इस कारण बाघों की आमद भी इंसानी इलाके में होने लगी है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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गोष्ठी में एफडी और डीडी मनोज कुमार सोनकर ने सभी को बाघ संरक्षण और बाघ बचाने का संकल्प दिलाया। गोष्ठी के बाद दुधवा पार्क से साइकिल रैली की शुरूआत की गई। रैली में शामिल पार्क कर्मी बाघ का मास्क लगाकर लोगों को जागरूक कर रहे थे। रैली दुधवा मुख्यालय तक आई और यहां से दोबारा एफडी संजय पाठक ने रैली को हरी झंडी दिखाकर दुधवा के लिए रवाना किया। द नेचर सोसाइटी की आदित्या मिश्रा, नाजरून निशा ने बाघ के महत्व पर विचार रखे, जबकि ममता, आवृत्ति, खुशबू, निधि, किशन, रवि, विक्रम, शिफान आदि ने बाघ दिवस पर आकर्षक रंगोली बनाकर लोगों को जागरूक किया। इस दौरान सोसाइटी के अध्यक्ष शेखर श्रीवास्तव, रवि शर्मा, अंकुर सिंह के साथ ही डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. मुदित गुप्ता समेत सभी रेंज के रेंजर, वन दरोगा व पार्क स्टाफ मौजूद रहा।
वन्यजीवों के संरक्षण की दी जानकारी
ममरी। ग्लोबल टाइगर डे मौके पर मोहम्मदी महेशपुर रेंज की कोठी कैंपस में बाघ संरक्षण विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें बाघ मित्रों, वन कर्मियों को वन्यजीवों के संरक्षण के बारे में जानकारी दी गई।
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डीएफओ समीर कुमार ने बताया कि विश्व में टाइगर की संख्या निरंतर बढ़ रही है। सरकार उनके संरक्षण पर विशेष बल दे रही है, जिनकी सुरक्षा करना और संरक्षण देना हम सभी का कर्तव्य है। डब्लूडब्लूएफ के परियोजना अधिकारी रोहित रवि ने कहा कि सभी बाघ मित्र अपने क्षेत्र के गांव में जाकर वन्य जीवों के प्रति जागरूकता अभियान चलाएंगे और लोगों को बाघ व तेंदुए की पहचान बताकर उनसे बचने के उपाय बताएंगे। गोष्ठी को रेंजर मोबीन आरिफ ने भी संबोधित किया। इस दौरान सभी वन कर्मी और 62 बाघ मित्र मौजूद रहे। संवाद
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