- दुजईपुरवा में बुखार से दो बच्चों की मौत का मामला
- गांव से इलाज के लिए आए मरीजों को नहीं किया भर्ती
गांव दुजईपुरवा में बुखार से चार दिन में दो बच्चों की मौत के बाद भी डॉक्टर संवेदनहीन बने हुए हैं। अभी तक गांव में डॉक्टरों की टीम जांच के लिए नहीं गई है। लोगों को आरोप है कि बुखार से पीड़ित बच्चों और बुजुर्गों को सीएचसी बिजुआ में भर्ती नहीं किया जा रहा है। कुछ बीमार बच्चे और बड़ों को अस्पताल में फर्श पर लिटाकर इलाज किया गया। शिकायत पर अस्पताल पहुंचे गोला विधायक विनय तिवारी और डॉक्टर के बीच कहासुनी भी हुई। फर्श और अस्पताल के बाहर पड़े बीमार बच्चों को देखकर गुस्साए विधायक ने यहां तक ताकीद कर दी कि अब अगर एक भी मौत हुई तो डाक्टर साहब लापरवाही का मुकदमा लिखवा दूंगा, जेल जाओगे। दुजईपुरवा गांव में दो सगे भाई बहनों चांदनी और अजय की तेज बुखार से मौत की घटना के बाद गांव के कई मरीज 108 एंबुलेंस से सीएचसी लाए गए थे। आरोप है कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने इन मरीजों को इलाज करने से मना कर दिया था।
अब नहीं आएंगे इलाज कराने
बिजुआ। विधायक का काफिला जाने के बाद मरीज अपने घर चले गए, बोले दोबारा अब नहीं आएंगे सरकारी अस्पताल में इलाज कराने। पुत्तु लाल के बड़े पुत्र कमलेश का एक बेटा अजय व बेटी चांदनी की पिछले 24 घंटे में मौत हो गई थी, पुत्तु के दूसरे बेटे बलराम की दो बेटियां रूपा व रीता भी दो दिन से आंख नहीं खोल रहीं, लोगों ने कहा कि सीएचसी में इलाज मुफ्त मिलेगा इसलिए यहां लाए थे। लेकिन पहले डाक्टर ने ठीक बताया, बाद में विधायक के दखल के बाद भर्ती करने के बाद उनके जाते ही उन्हें रेफर को कह दिया।
रीता और रूपा को दो दिन पहले हालत खराब होने पर अस्पताल लाया गया था, रीता की मां का आरोप है कि यहां पर बोतल के नाम पर दो सौ रुपए मांगे, कहा अगर नही हैं तो घर ले जाओ नही है इलाज, काफी समझाने के बाद शुक्रवार को फिर से रूपा और रीता को अस्पताल लाया गया था, लेकिन आज भी इलाज नहीं मिल सका।
दस्त पखवाड़ा में गांव में नहीं बांटी गई जिंक और ओआरएस की दवा
गांव में महिलाओं ने आरोप लगाए कि गांव में कोई भी दवा नही बांटी गई थी, आशा व एएनएम के माध्यम से भी कोई दवा का वितरण नही हुआ।