मासूम की रेप के बाद हत्या का मामला
घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में बरती थी लापरवाही
वीडियोग्राफी को लेकर सीओ-एसओ ने बोला था झूठ
मासूम बच्ची के साथ रेप के बाद हत्या के मामले में लापरवाही बरतने के मामले को एसपी ने गंभीरता से लिया है। एसपी ने माना कि पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी न कराना पुलिस की घोर लापरवाही है लेकिन उन्होंने इस मामले की जांच उन सीओ को ही सौंप दी है, जिन पर उंगली उठी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि सीओ खुद अपने और एसओ के ऊपर उठे सवालों के जवाब क्या निष्पक्ष रूप से दे पाएंगे।
मासूमों के साथ रेप और हत्या जैसे मामले में कानून को कठोर कर दिया गया है। हैवानियत दिखाने वाले दरिंदे साक्ष्यों के अभाव में सलाखों के बाहर न आ जाएं, इसके लिए शासन ने सभी जिलों में फील्ड यूनिट स्थापित की है। यानी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस पीड़ित के परिवार वालों को न्याय दिला सके। अक्सर पुलिस की कार्यशैली और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर होने वाले विवादों से बचने के लिए शासन ने ऐसे मामलों में शव के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी जरूरी कर दी थी, लेकिन पहली जुलाई को थाना पसगवां क्षेत्र में हरदोई जिले के थाना मझिला के गांव सेमरापुरवा निवासी सर्वेश पासी ने एक आठ वर्षीय बालिका के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। आरोपी ने घास काट रही बालिका के मुंह में कपड़ा ठूंस कर उसके साथ रेप किया था, फिर उसकी हत्या कर दी थी। दिल को झकझोर देने वाली इस घटना में पुलिस ने घोर लापरवाही की। पुलिस ने न तो फील्ड यूनिट को बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और न ही पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई। अमर उजाला ने तीन जुलाई के अंक में फील्ड यूनिट बुलाई न ही कराई पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी शीर्षक से खबर को प्रमुखता से छापा था। खबर को एसपी ने संज्ञान में लिया और इसे पुलिस की घोर लापरवाही मानी। उन्होंने इसकी जांच के आदेश भी दिए लेकिन जांच सीओ मोहम्मदी रामशंकर सिंह को ही सौंप दी जिन्होंने वीडियोग्राफी को लेकर झूठी बयानबाजी की। ऐसे में जांच सही हो पाएगी, यह भी सवाल खड़ा हो गया है।
अमर उजाला में ही खबर पढ़ी थी। वीडियोग्राफी न कराना घोर लापरवाही है। इसकी जांच सीओ मोहम्मदी से कराई जाएगी। जांच में जो दोषी होगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।
- अखिलेश चौरसिया, एसपी