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शिवबालक की हत्या करने वाले को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock
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मृतक की पत्नी और एक अन्य पर्याप्त सुबूतों के अभाव में हुए बरी
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अवैध संबंधों में बाधक बनने पर 25 अक्तूबर 2012 को हुई थी शिवबालक की हत्या, पत्नी ने पुलिस को किया था गुमराह
लखीमपुर खीरी। अवैध संबंधों में बाधक बने ग्रामीण की हत्या के मामले में एडीजे अनिल कुमार ने हत्याभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुनील सिंह तोमर ने बताया कि फरधान थाना क्षेत्र के ग्राम धौरहरा खुर्द में रहने वाले शिवबालक वर्मा की पत्नी रेखा का चालचलन ठीक नहीं था। वह अक्सर मोबाइल पर बाहरी लोगों से बात करती रहती थी। इसे लेकर कई बार शिवबालक से उसकी कई बार कहासुनी भी हुई थी।
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25 अक्तूबर 2012 को शिवबालक शाम तीन बजे रेखा को मोटर साइकिल पर बैठाकर नहर पटरी से जा रहे थे। सुनसान स्थल पर साइफन के पास हत्याभियुक्त पहलू उर्फ समीउद्दीन और शिब्बू ने पतली डोरी से गला घोटकर और चाकू मारकर शिवबालक की हत्या कर तीनों ने मिलकर शव छुपा दिया था।
उधर, मृतक की पत्नी अकेली घर लौट आई। घरवालों के पूछने पर कहा कि पति शिवबालक ससुराल कुल्हौरी चले गए होंगे। इसके बाद वह रूकुदीपुर चली गई। कई दिनों तक शिवबालक का पता नहीं चलता तो उसके रिश्तेदार चिंतित हुए। ममेरे भाई रामसनेही ने शिवबालक की गुमशुदगी की सूचना 26 अक्तूबर को फरधान थाने में दर्ज कराई। इसी पड़ताल के बीच 31 अक्तूबर को पुलिस ने उसकी पत्नी रेखा से पूछताछ के लिए घर पर दबिश दी तो वहीं दीवार फांदकर भागते समय समीउद्दीन उर्फ पहलू पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि मृतक की पत्नी से पहलू उर्फ समीउद्दीन के अवैध संबंधों में शिवबालक अड़ंगा बनता था। इसलिए रेखा देवी की मदद से समीउद्दीन ने अपने साथी शिब्बू के साथ शिवबालक की हत्या कर दी और लाश छिपा दी है। पुलिस को ले जाकर पहलू उर्फ समीउद्दीन ने लाश बरामद कराई थी। घटना के एक महीने बाद पुलिस ने लावारिस हालत में मृतक की मोटर साइकिल बरामद की थी।
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अदालती सुनवाई में रामसनेही के साथ ही शिवपूजन, डॉ. आरके वर्मा, सरोजनी देवी, एसआई नंदलाल, अजय सिंह, शिवगोपाल सिंह एसओ बृजेंद्र सिंह ने अपनी गवाही दी।
अदालत ने बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाते हुए पहलू उर्फ समीउद्दीन को दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही पचास हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। वहीं हत्यारोपी रेखा देवी और शिब्बू की संलिप्तता के पर्याप्त सबूत न होने के कारण अदालत ने दोनों सह आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है।
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