लखीमपुर खीरी। जनपद में कृषि आधारित उद्योगों चीनी मिल और क्रशर से निकलने वाला गंदा केमिकल युक्त पानी भूगर्भ जल को प्रदूषित कर रहा है। कुछ चीनी मिलों ने तो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखे हैैं, लेकिन क्रशर में इस तकनीक का उपयोग नहीं हो रहा। इससे गंदा पानी यूं ही आसपास की खंतियों में बहाया जा रहा है। इससे पशुओं की मौतें हो जाती हैं, तो वहीं आसपास के गांवों में बीमारियां फैलती हैं। निघासन क्षेत्र में क्रशर से निकलने वाले दूषित पानी से परेशान छात्राएं और विद्यालय प्रशासन ने डीएम से शिकायत भी कर चुका है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ऑफिस न होने से कार्रवाई नहीं हो पाती है। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूगर्भ जल दूषित करने वालों को सात साल की जेल और 20 लाख जुर्माने का प्रावधान कर दिया है, जिससे कार्रवाई होने की उम्मीद है।
पलियाकलां। क्षेत्र की संपूर्णानगर चीनी मिल से गंदा प्रदूषित पानी निकलता है, जो भूगर्भ जल को दूषित कर रहा है। इससे यहां पर बीमारियां भी फैल रही हैं। उधर, पलिया मिल पर भी लोगों का यही आरोप है। हालांकि मिल प्रशासन इस बात से लगातार इनकार करता रहा है और प्रदूषित पानी से भूगर्भ दूषित न होने की बात कहता है।
संपूर्णानगर चीनी मिल का गंदा पानी परसपुर सहित आसपास के कई इलाकों में नाले का रूप लेकर बहता है। इससे उठने वाली दुर्गंध वातावरण को तो प्रदूषित करती ही है, साथ में भूगर्भ जल को भी प्रभावित करती है। यही हाल पलिया मिल का भी है। हालांकि मिलों के प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि पानी भूगर्भ जल को किसी प्रकार से दूषित नहीं करता।
निघासन में भी दूषित हो रहा भूगर्भ जल
निघासन। क्रशरों से निकलने वाले गंदे पानी से तराई इलाके का भूगर्भ जल दूषित हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग अंजान बना हुआ है। राहगीरों और वहां पर रहने वालों को सांस लेने में भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। टांडा स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं और प्रधानाचार्य ने मामले की शिकायत डीएम से की थी, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
शुगर मिलों में रियल टाइम मॉनीटिरिंग सिस्टम लगे हैं, जिससे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इनकी ऑनलाइन मानीटिरिंग करता है। क्रशरों में यह सिस्टम नहीं लगे हैं, जिससे दूषित पानी बहाए जाने की आशंका हो सकती है। सरकार से प्राप्त निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
दूषित पानी बहाए जाने का मामला संज्ञान में नहीं है। यदि शिकायत मिलती है या निरीक्षण के दौरान ऐसा मामला मिलता है, तो कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ रामकरन, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड