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हाथियों से हुई फसल नुकसान का दो साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा

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नष्ट फसल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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नेपाल के जंगली हाथियों ने सैकड़ों किसानों की मेहनत पर फेरा पानी
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वन विभाग से मुआवजा मिलने में कभी महीनों तो कभी लग जाते हैं वर्षों
लखीमपुर खीरी। जंगल के आसपास बसे किसानों के सामने मुसीबतें कम नहीं हैं। एक तरफ हिंसक जंगली जानवरों के हमले का खतरा तो दूसरी तरफ जंगली हाथियों से होने वाले नुकसान से किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को नुकसान का मुआवजा मिलने में कभी महीनों तो कभी वर्षों भी लग जाते हैं। दो साल पहले नेपाल के जंगली हाथियों ने किसानों को जो नुकसान किया था, उसका मुआवजा आज तक नहीं मिला है।
करीब तीन माह से नेपाल से आया हाथियों का एक बड़ा झुंड दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी और बफर जोन में डेरा डाले है। यह जंगली हाथी अब तक सौ से अधिक किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि में खड़ी धान और गन्ने की फसल रौंद कर बर्बाद कर चुके हैं। दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी रेंज में तो यह जंगली हाथी किसानों की फसल तबाह करने के साथ साथ एक ग्रामीण की जान भी ले चुके हैं। हाथियों के उत्पात से किसान परेशान हैं। जंगली हाथियों ने किसानों का जो नुकसान किया था। उसका अभी तक सर्वे भी शुरू नहीं हो सका है। अब तक सिर्फ 14 किसानों ने फसल नुकसान के मुआवजे को लेकर अपना दावा पेश किया है। अब इन दावों का राजस्व विभाग से नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद ही मुआवजे की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी।
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दो साल पहले वर्ष 2019 में भी नेपाल से जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड संपूर्णानगर रेंज होते हुए यहां पहुंचा था और किशनपुर सेंक्चुरी, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन और पीलीभीत टाइगर रिजर्व जंगल में करीब दो महीने तक रहा था। इस दौरान इन हाथियों ने कई किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया था। इनमें से अकेले दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन जंगल के आसपास बसे 47 किसान ऐसे हैं जिन्हें दो साल बीत जाने के बाद भी मुआवजा नहीं मिल सका है। वन विभाग का कहना है कि 2020 में लॉकडाउन के कारण मुआवजे की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के मैलानी रेंज जंगल के आसपास वर्ष 2019 में जंगली हाथियों से तबाह हुई फसलों का सर्वे राजस्व विभाग से कराया गया था। इसमें 47 किसानों का 5,70,000 रुपये का मुआवजा बना था, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी उन्हें अब तक एक ढेला भी मुआवजे के रूप में नहीं मिला है, जबकि बेलरायां रेंज में वर्ष 2020-21 में 32 किसानों को 10,08000 रुपया का मुआवजा दिया जा चुका है। इस साल अब तक सिर्फ 14 किसानों ने फसल नुकसान के मुआवजे के लिए दावा किया है, इन किसानों की करीब दो लाख 56 हजार रुपये की फसल क्षति होने का अनुमान है। वन विभाग अभी और दावों का इंतजार कर रहा है।
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वर्ष 2019 में नेपाल के जंगली हाथियों ने जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया था। उनके नुकसान का सर्वे करा लिया गया है। 2020 में लॉकडाउन के चलते सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने में देरी होने से मुआवजे का भुगतान नहीं किया जा सका था। जल्द ही चिह्नित किसानों को मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। - डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन
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