पसगवां। स्वच्छ भारत योजना पसगवां ब्लॉक में मखौल बन कर रह गई है। सफाई कर्मचारियों की कमी और पंचायतों की उदासीनता के चलते स्वच्छता अभियान को पलीता लग रहा है। बड़ी बड़ी और कस्बानुमा ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मचारी हैं ही नहीं। इससे स्वच्छ भारत मिशन का मखौल उड़ रहा है।
109 ग्राम पंचायतों वाले ब्लॉक पसगवां में कुल 213 राजस्व गांव हैं, मजरे अलग। लेकिन सफाई कर्मचारी केवल 131 हैं। इसमें भी छह इस समय इलेक्शन ड्यूटी में चले गए हैं। कुछ समय पहले 133 सफाई कर्मचारी थे, लेकिन उसमें दो निलंबित चल रहे हैं। बड़ी ग्राम पंचायतें पसगवां, मैगलगंज, खखरा, सल्लिया उर्फ जेबी गंज, उचौलिया, बनका गांव, रामपुर ग्रंट, सुखवसा, बचिगावां, अजबापुर, जसमढ़ी, नरदी आदि सफ़ाई कर्मी विहीन हैं। इसमें भी मैगलगंज, खखरा, जेबी गंज और उचौलिया नेशनल हाईवे पर हैं और पूरी तरह कस्बे के रूप में हैं।
इन बड़ी ग्राम पंचायतों में एक सफाई कर्मी से काम भी नहीं चल सकता है। एडीओ पंचायत देवेंद्र कुमार बताते हैं कि जिन गांवों में गंदगी की स्थिति ज्यादा खराब होती है तो टीम बनाकर सफाई कराई जाती है लेकिन बहुत कम मौकों पर टीम भेज पाना संभव नहीं हो पाता है। कुछ माह पूर्व मैगलगंज और जेबी गंज में टीम बनाकर बड़े स्तर पर जेसीबी की सहायता से सफाई करवाई गई थी। सामान्य स्तर पर स्थिति बड़ी खराब है।
गलियों में, सड़कों के किनारे, तालाब के किनारे और घने मोहल्लों में न नालियां साफ हैं और न ही कूड़ा-करकट फेंकने का कोई उचित स्थान है। यहां तक कि नाली और कूड़ा-करकट फेंकने को लेकर गांवों में आए दिन झगड़े होते रहते हैं। नागरिकों का कहना है कि बीते समय में व्यापक स्तर पर डेंगू फैल चुका है।
कोरोना का सामना कर ही रहे हैं मगर सफाई पर फोकस कभी नहीं किया गया। उनकी मांग है कि यदि सफाई कर्मी नहीं हैं तो पंचायतों को अधिकार देकर संविदा पर या अस्थाई सफाई कर्मी रखकर नालियों की सफाई कराई जाए और कूड़ा-करकट फेंकने का स्थान भी नियत किया जाए।