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आलू के दाम आसमान पर

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गोला मंडी समिति में आढ़त पर लगा आलू। - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। कभी आलू खाकर गुजारा करने वाले गरीब तबके की थाली से अब आलू की सब्जी ही कम हो गई है। कोरोना काल में आलू के दामों में जो उछाल आया वह कम नहीं हो रहा है। आलम यह है कि आज मंडी में पुराना आलू जहां 35 से 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है वहीं नए आलू के दाम आसमान छू रहे हैं। कल तक 50 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाला नया आलू सोमवार को 60 रुपये प्रति किलो बिका। हैरत की बात तो यह है कि आलू के लगातार बढ़ रहे दामों को लेकर जहां आम आदमी परेशान है वहीं भंडारण करने वालों पर अब तक कोई शिकंजा नहीं कसा गया। राजापुर मंडी के थोक व्यापारी लक्ष्मीकांत बताते हैं कि पंजाब से आने वाला नए आलू का थोक थाम 5000 से 5200 रुपये प्रति क्विंटल और बंगलरू व पूना के आलू का थोम दाम 4000 से लेकर 4500 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके अलावा भाड़ा भी बढ़ गया है, इसका असर मंडी पर पड़ रहा है।
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आलू चिप्सोना नया-40 रुपये प्रतिकिलो
पुराना आलू-35 रुपये प्रतिकिलो
पंजाब का नया आलू- 60 रुपये प्रतिकिलो
टमाटर- 40 रुपये प्रतिकिलो
प्याज-40 से 60 रुपये प्रतिकिलो
लौकी-20 रुपये प्रतिकिलो
कद्दू-20 रुपये प्रतिकिलो
सोया- 20 से 30 रुपये प्रतिकिलो
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नोट- यह रेट सब्जी मंडी से लिए गए हैं।
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पैदावार कम होने से बढ़ा आलू का भाव
इस वर्ष पैदावार कम होने से आलू के दाम बढ़े हैं। नया आलू के थोक भाव 5400 रुपये और पुराना आलू 3,000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल थोक रेट है। दिवाली के बाद स्थानीय पैदावार की आवक आनी शुरू हो जाएगी, जिससे आलू के भाव गिरेंगे। इस समय आलू फर्रुखाबाद, आगरा, हल्द्वानी से आ रहा है। फुटकर मंडी में आलू के दाम प्रतिकिलो के हिसाब से कुछ बढ़ जाते हैं।
-जमाल अहमद राईन
प्रमुख आलू व्यापारी।
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संसारपुर निवासी संजीव कनौजिया का कहना है कि बाजार में आलू 60 रुपये किलो बिक रहा है। आलू की बढ़ी कीमत ने बजट बिगाड़ दिया है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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रोशननगर के संजीव अग्निहोत्री का कहना है कि इस समय आलू असमान छू रहा है। नया आलू 60 रुपये किलो, पुराना 40 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जी की इतनी महंगाई है कि खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
पहाड़पुर के अशोक यादव का कहना है कि आलू के दाम इतने बढ़ गए हैं कि 5 किलो धान बेचने पर एक किलो आलू मिलता है। आलू ही वह सब्जी है जो गरीब तक की थाली में मिलता है। आलू के बढ़े दामों ने आमजन की मुश्किलें बढ़ा दी है।
नगर के मोहल्ला मुन्नूगंज निवासी कंचन अग्निहोत्री का कहना है कि किचन की शान कहे जाने वाले आलू के महंगा होने से पूरा बजट गड़बड़ा गया है। आलू ही मुख्य सब्जी है। सरकार को आलू के दाम कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। संवाद
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