बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन में फिशिंग कैट का नहीं सिवेट कैट का शिकार हुआ था। रेंजर को प्रथम दृष्टया शव देखकर फिशिंग कैट होने का आभास हुआ था, लेकिन जब शव को बारीकी से परखा गया तो पता चला कि वह सिवेट कैट के शावक थे। फिशिंग कैट शेड्यूल वन का प्राणी है, जबकि सिवेट कैट शेड्यूल थ्री का प्राणी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज में शुक्रवार रात गश्त करते समय वन कर्मियों ने तीन शिकारियों को धर दबोचा। इन शिकारियों भरिगवां गांव निवासी लक्ष्मन और बनवारी के अलावा जिला शाहजहांपुर के खुटार थाना क्षेत्र के नरौठा गांव निवासी राजाराम के पास से कैट प्रजाति के जानवरों के शव बरामद हुए। पूछताछ में इन शिकारियों ने बताया कि उन्होंने इन जानवरों का खरेहटा जंगल से शिकार किया था।
रेंजर ने रात में जब इन जानवरों के शव को देखा तो उन्हें फिशिंग कैट होने का आभास हुआ, लेकिन शनिवार सुबह जब इनका बारीकी से परीक्षण किया तो यह पता चला कि यह सिवेट कैट के शव हैं। इन दोनों जानवरों की शक्ल-सूरत काफी मिलती जुलती है, लेकिन फिशिंग कैट की प्रजाति तेजी से लुप्त हो रही है, इसलिए इसे शेड्यूल वन की श्रेणी में रखा गया है, जबकि सिवेट कैट शेड्यूल थ्री की श्रेणी में आता है। डीटीआर बफरजोन के डीडी डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि पकड़े गए तीनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस काटकर उन्हें जेल भेज दिया है।