दो अप्रैल से शुरू होगा शक्ति आराधना का महापर्व
दस अप्रैल को नवमी के दिन हवन-पूजन कर पूरा होगा अनुष्ठान
लखीमपुर खीरी। कल से शक्ति आराधना के नौ दिवसीय महापर्व नवरात्र शुरू हो जाएंगे। इस बार एक भी तिथि की हानि न होने से नौ दिन तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का पूजन होगा। इसको लेकर मंदिर एवं घरों में तैयारियां शुरू हो गईं। अष्टमी पूजन जहां शनिवार को होगा तो वहीं नवमी पूजन दस अप्रैल यानी रविवार को होगा। इसी दिन हवन-पूजन कर अनुष्ठान पूर्ण किया जाएगा।
मां दुर्गा के भक्तों को नवरात्र का बेसब्री से इंतजार रहता है। इन नौ दिन तक भक्त देवी मंदिरों से लेकर घरों में मां की साधना में लोग लीन रहते हैं। भक्त घरों में घट स्थापना कर पूरे नौ दिन तक व्रत रहकर अनुष्ठान करते है। कुछ भक्त जहां पहले और आखिरी दिन व्रत रखते हैं, तो वहीं कुछ भक्त पूरे दिन तक व्रत रहते हैं। हालांकि आमतौर पर नवरात्र में एकाध तिथियों की हानि होने से नवरात्र व्रत नौ दिन के न होकर आठ दिन के हो जाते हैं। इस दिन हवन, पूजन के साथ कन्या भोज कराकर व्रत का पाराण करते हैं। मगर, इस बार भक्त पूरे नौ दिन तक व्रत रहकर मां की आराधना करेंगे। व्रत का समापन दस अप्रैल यानी रविवार को हवन पूजन एवं परायण कर पूरा होगा।
प्रतिपदा तिथि
प्रारंभ- एक अप्रैल सुबह 11:35 और समाप्ति दो अप्रैल सुबह 11:37 पर
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त-
शनिवार दो अप्रैल प्रात:काल 05:59 से 08:31 तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:08 से 12:57 तक
दिनांक दिन तिथि पूजन
दो अप्रैल शनिवार प्रतिपदा मां शैलपुत्री
तीन अप्रैल रविवार द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी
चार अप्रैल सोमवार तृतीया मां चंद्रघंटा
पांच अप्रैल मंगलवार चतुर्थी मां कुष्मांडा
छह अप्रैल बुधवार पंचमी मां स्कंदमाता
सात अप्रैल बृहस्पतिवार षष्ठी मां कात्यानी
आठ अप्रैल शुक्रवार सप्तमी मां कालरात्रि
नौ अप्रैल शनिवार अष्टमी मां महागौरी
दस अप्रैल रविवार नवमी मां सिद्घिदात्री
इस बार चैत्र तिथियों की हानि न होने से नवरात्र व्रत नौ दिन के होंगे। नवरात्र महापर्व दो अप्रैल से 10 अप्रैल को नवमी तक रहेगा। इस दिन हवन-पूजन कर व्रतधारी अनुष्ठान पूरा करेंगे। वहीं शनिवार से ही नवसंवत्सर प्रारंभ हो रहा है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष का आगाज होता है, क्योंकि ब्रह्मा जी ने आज ही के दिन सृष्टि की रचना आरंभ की थी।
- आचार्य प्रमोद दीक्षित, संचालक, स्वर्गीय श्रीमती चंद्रकला आश्रम एवं संस्कृत विद्यापीठ देवकली तीर्थ