लखीमपुर खीरी के मितौली क्षेत्र के पकरिया जलालपुर में कड़ी सुरक्षा के बीच आसाराम के शव का अंतिम संस्कार किया गया। परिजन शव को पहले दफनाना चाहते थे। बाद में उन्हें समझाया गया, इस पर वह मान गए। इसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।
लखीमपुर खीरी के मितौली क्षेत्र में पकरिया जलालपुर गांव निवासी आसाराम की शुक्रवार रात पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। परिजनों ने पुलिस पर करंट और बेरहमी से पिटाई कर हत्या का आरोप लगाते हुए छह घंटे तक बवाल किया। मामले में पिपरझला पिकेट प्रभारी लालचंद और हेड कांस्टेबल बृजपाल के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई है। रविवार सुबह परिजनों ने पुलिस सुरक्षा में शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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एक वकील ने परिजनों को शव दफनाने पर जोर दिया। परिजन भी तैयार हो गए, लेकिन लोगों के समझाने पर अंतिम संस्कार किया। कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी सांत्वना देने पहुंचे। गांव में पुलिस तैनात है। अभी तक आरोपी पिकेट प्रभारी व हेड कांस्टेबल की गिरफ्तारी नहीं की गई है और न ही उन्हें सस्पेंड किया गया है।
पुलिस ने पांच साल की बच्ची अंशू की हत्या के आरोप में पूछताछ करने के लिए आसाराम को बुलाया था लेकिन पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई। दरअसल, परिजन रविवार सुबह शव को दफनाना चाह रहे थे। पूर्व विधायक कस्ता सुनील कुमार लाला व जिला पंचायत सदस्य बेहजम/पासी के जिलाध्यक्ष रामशंकर राज के समझाने के बाद परिजन दाह संस्कार के लिए माने।
सुबह से एहतियातन पुलिस तैनात रही। एडिशनल एसपी नैपाल सिंह सुबह से ही कस्ता पुलिस पिकेट पर मौजूद रहकर नजर बनाए रहे। एसडीएम विनीत कुमार उपाध्याय, सीओ शमशेर बहादुर सिंह भी पुलिस पिकेट पर मौजूद रहे। इसके अलावा करीब आधा दर्जन थानों की पुलिस मौजूद रही।