लखीमपुर खीरी। रबी सीजन में फसलों की बुआई तेज होने के साथ ही किसानों में खादों की एकाएक डिमांड बढ़ गई है, जिससे सहकारी समितियों से खाद गायब होने लगी है। कई जगह किल्लत भी हो गई है। ऐसे में प्राइवेट खाद दुकानदार कमाई के फेर में ओवररेटिंग करने लगे हैं। खासकर डीएपी व एनपीके को अधिक मूल्य पर बेचे जाने की शिकायतें किसान कर रहे हैं। अधिकारियों के सामने खाद की कालाबाजारी रोकने के साथ ही किसानों को खाद की आपूर्ति सुनिश्चित कराने की चुनौती हो गई है।
रबी सीजन में प्रमुख रूप से गेहूं व लाही की बुआई तेजी से की जा रही है, जिसके लिए डीएपी व एनपीके खाद की डिमांड सबसे अधिक है। किसानों की खाद आपूर्ति करने के लिए 132 सहकारी समितियां संचालित हैं, जहां किसान खाद लेने के लिए पहले पहुंचते हैं। इससे समितियों पर खाद का स्टॉक पहुंचते ही एक-दो दिन में खत्म हो जा रहा है। लिहाजा प्राइवेट दुकानदार मौके का फायदा उठाते हुए डीएपी व एनपीके को महंगे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाने की होड़ में जुट गए हैं। एनपीके के रेट हाल में 1185 से बढ़ाकर 1450 रुपये प्रति बोरी कर दिया गया है, लेकिन समितियों में अभी पुराने रेट की एनपीके आ रही है। इस कारण ज्यादातर किसान समितियों पर एनपीके लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां से निराश होकर लौटना पड़ रहा है। वहीं प्राइवेट दुकानों पर नए रेट की एनपीके बेची जा रही है। उस पर भी शार्टेज का हवाला देकर 20 से 30 रुपये प्रति बोरी अधिक रेट वसूला जा रहा है। वहीं डीएपी का रेट 1200 रुपये प्रति बोरी है, लेकिन समितियों पर उपलब्धता न होने से प्राइवेट दुकानदार इसे भी एमआरपी से अधिक रेट पर बेच रहे हैं। मितौली स्थित साधन सहकारी समिति के सचिव शिव विनोद सिंह ने बताया कि डीएपी व एनपीके खाद एक दिन पहले खत्म हो गई है। चेक लगाया है एक-दो दिन में खाद मिलने की उम्मीद है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि जनपद में खादों की पर्याप्त उपलब्धता है और समितियों पर खाद लगातार भेजी जा रही है। जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि दो रैक डीएपी की डिमांड की गई है। एक रैक डीएपी समितियों को आपूर्ति की जाएगी, जबकि दूसरी रैक की खाद प्राइवेट दुकानों पर भेजी जाएगी।
आवश्यकता से अधिक खाद न लें किसान
जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि राजकीय बीज भंडारों पर पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध हैं और विभिन्न खादों का पर्याप्त स्टॉक है। बताया कि किसान अपनी आवश्यकतानुसार जोतबही/खतौनी के अनुसार खाद खरीदें। उन्होंने कहा कि ओवररेटिंग से बचने के लिए पॉश मशीन के माध्यम से आधार कार्ड से खाद प्राप्त करें। जनपद में यूरिया 24664 मीट्रिक टन, डीएपी 3953 मीट्रिक टन, एनपीके 8489 मीट्रिक टन, एसएसपी 9750 मीट्रिक टन, एमओपी 635 मीट्रिक टन और कंपोस्ट 32.250 मीट्रिक टन उपलब्ध है।
कंट्रोल रूम के नंबर पर दर्ज कराएं शिकायत
बोरे पर अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर कोई किसान खाद न खरीदें। यदि कोई खाद विक्रेता बोरे में अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर खाद की बिक्री करता है, तो इसकी शिकायत कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम के नंबर 8400082999 पर दर्ज कराएं। शिकायत का तुरंत निराकरण कराते हुए संबंधित दुकानदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
1600 रुपये में बिक रही एनपीके
ममरी। कस्बे की साधन सहकारी समिति में एनपीके और डीएपी खाद का टोटा होने से किसानों को गेहूं व लाही की बुआई करने में दिक्कतें आ रही हैं। प्राइवेट दुकानों से एनपीके व डीएपी खाद महंगे रेट में खरीदने को विवश होना पड़ रहा है। सचिव रविंद्र कुमार ने बताया कि एनपीके खाद एक सप्ताह पूर्व समाप्त हुई है। डिमांड चेक भेजी गई है। वहीं झाऊपुर समिति के सचिव मिथलेश सिंह यादव ने बताया कि उनकी समिति में एनपीके खाद की अभी कुछ बोरियां बची हैं। अगली खेप के लिए डिमांड चेक लगा है। हैदराबाद के किसान मोइन खान ने बताया कि उन्हें लाही की बुवाई करने के लिए एनपीके खाद समितियों पर नहीं मिल रही है। प्राइवेट दुकानों पर एनपीके 1600 रुपये प्रति बोरी की दर से बिक रही है। किसान फूलचंद वर्मा ने बताया कि समितियों पर खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे प्राइवेट दुकानों पर महंगे दाम पर खाद मिल रही है।
मोहम्मदी: सहकारी समितियों पर खाद न मिलने से किसान परेशान
मोहम्मदी। सहकारी समितियों पर खाद न मिलने से किसान परेशान हैं। क्षेत्र के साधन सहकारी समिति गुलरिया परवसतनगर, दिलावरपुर, गोकन, बगरेठी, फरेंदा, गुलौरी आदि समितियों पर डीएपी यूरिया खाद न मिलने से किसानों की गेहूं, सरसों की बुआई पिछड़ रही है। गुलरिया परवसतनगर के सचिव राकेश कुमार शुक्ला ने बताया कि खाद की डिमांड भेजी गई है। रैक लगने पर खाद समिति में आ जाएगी। केहुआ के किसान सोमपाल सिंह कहते हैं इस समय गेहूं की बुआई चल रही जिसमें डीएपी खाद की आवश्यकता है। राजापुर सोसायटी पर डीएपी यूरिया दोनों खाद किसानों को वितरित की जा रही है। समिति के चेयरमैन देवेश प्रताप सिंह ने बताया कि उनकी समिति में डीएपी, यूरिया दोनों खादें है। 4200 सौ किसान समिति के सदस्य हैं।
खाद की किल्लत से खेती-बाड़ी चौपट
बांकेगंज। ब्लॉक क्षेत्र में खाद की किल्लत के चलते किसानों की खेती-बाड़ी चौपट हो रही है। ऐन गेंहू फसल बुआई के समय बाजार और सहकारी समितियों पर डीएपी और एनपीके और यूरिया खाद का टोटा है। एक-एक बोरी खाद के लिए किसान दुकानों और समितियों के दफ्तर पर चक्कर काट रहा है, लेकिन खाद न मिलने वे दर-दर भटक रहे हैं। डीएपी को लेकर सरकारी वितरण केंद्रों पर जबरदस्त मारामारी मची हुई है।
ब्लॉक क्षेत्र की पंचायत ग्रंट डाटपुर की पूर्व प्रधान एवं महिला किसान नन्हीं देवी बतातीं हैं कि मूल्यों में बढ़ोतरी के बावजूद बाजार और समितियों में खाद की किल्लत हैं। गेंहू बुआई के लिए खाद न मिलने से किसानों की खेती-बाड़ी चौपट हो रही है। वहीं डीएपी को लेकर सरकारी वितरण केंद्रों पर मारामारी मची हुई है।
बांकेगंज के खैरताली गांव निवासी किसान मनोज कुमार का कहना है कि रबी सीजन में बुआई की जाने वाली गेहूं, लाही, मसूर आदि फसलों में डाली जाने वाली खादों की किल्लत के चलते किसान दर-दर भटक रहे हैं। इसके चलते गेहूं फसल के साथ ही अन्य दलहनी फसलों की बुवाई पिछड़ रही है।
बांकेगंज के मोहल्ला कोठीपुर निवासी किसान भगवानदीन का कहना है कि ऐन गेहूं फसल बुआई के समय डीएपी, एनपीके और यूरिया खाद की किल्लत के चलते किसान समय से फसल बुआई नहीं कर पा रहे हैं। गेहूं फसल की देरी से बुवाई होने से उत्पादन में कमी आएगी।
बांकेगंज के स्टेशनपुरवा निवासी किसान अनवर अली का कहना है कि बाजार और सहकारी समितियों पर खाद न मिलने से किसानों की नींद उड़ी हुई है। गेहूं बुआई के लिए उनके खेत जुतकर तैयार हैं, मगर खाद न मिलने से किसान बुआई नहीं कर पा रहे हैं। एक-एक बोरी खाद के लिए किसान दुकानों और समितियों के चक्कर काटते घूम रहे हैं।