सदर कोतवाली पुलिस कचहरी से पुलिस की गाड़ी में जिला जेल ले गई
आननफानन में आधे घंटे में ही पूरी की गई सभी जरूरी कार्यवाही
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा का मुख्य आरोपी और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र ने नाटकीय घटनाक्रम के तहत मोहलत के एक दिन पहले रविवार को ही सरेंडर कर दिया। सदर कोतवाली पुलिस उसे कचहरी से पुलिस की गाड़ी में जिला जेल लेकर गई।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत आदेश रद्द होने के बाद तिकुनिया हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्र मोनू की ओर से जेल जाने से पहले अपने अधिवक्ता की जन्मदिन पार्टी में शिरकत करने का निर्णय लिया गया। रविवार को वरिष्ठ अधिवक्ता के जन्मदिन की पार्टी के नाम पर पारिवारिक, मिलने वाले लोग और तमाम दिग्गज वरिष्ठ भाजपाई जुटने लगे।
आशीष वहां से सीधे सीजेएम कोर्ट परिसर पहुंचा। वहां से ही एलआईयू और सदर कोतवाली पुलिस को खबर दी गई, तब फौरन प्रशासनिक अमला आशीष मिश्र मोनू के शांतिपूर्ण आत्मसमर्पण को अमलीजामा पहनाने लगा। एक घंटे के भीतर ही न्यायिक अधिकारियों पुलिस और अभियोजन से जुड़े लोग बुलाए गए। अदालत में रिमांड ड्यूटी पर वैसे तो एक ही कोर्ट मुहर्रिर रहता है और एक सहायक अभियोजन अधिकारी की तैनाती होती है, लेकिन रविवार को सहायक अभियोजन अधिकारी प्रदीप कुमार के साथ ही सुभाष यादव भी सीजेएम कोर्ट में डटे रहे। आखिरकार मीडिया कर्मियों से बचते हुए आधे घंटे के भीतर ही अदालती कार्रवाई पूरी कर आशीष मिश्र को पुलिस ने जिला जेल पहुंचा दिया।
मोहलत से एक दिन पहले किया सरेंडर
लखीमपुर खीरी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जमानत आदेश रद्द किए जाने के बाद 18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक सप्ताह की मोहलत दी गई थी, जो 25 अप्रैल को पूरी हो रही थी, लेकिन आशीष मिश्र ने एक दिन पहले ही अदालत में पेश होकर आत्मसमर्पण कर दिया। हालांकि, उनके खेमे के लोगों की तरफ से मीडिया को यह कहकर गुमराह करने का प्रयास किया गया कि आशीष मिश्र मोनू 25 अप्रैल को ही आत्मसमर्पण करेगा।
दहशत इतनी की खामोशी अख्तियार
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नामजद आरोपी का रसूख रविवार को सिविल कोर्ट में साफ नजर आया। आशीष मिश्र के आत्मसमर्पण करने के मामले में अभियोजन पक्ष से जुड़े लोग भी मीडिया से बातचीत करने से कतराते रहे। अभियोजन पक्ष की ओर से बड़े सिपहसालार तो दूर कोर्ट मुहर्रिर से लेकर अदालत के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक ने अपनी जुबान पर ताला लगा रखा था। मानो किसी ने उन्हें मुंह बंद रखने को हिदायत दे रखी हो। संवाद
मीडिया से बचने का पुराना नाता
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा मामले में वैसे तो मीडिया का ही सहारा लेते हुए घटना के तीसरे दिन के लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए आशीष मिश्र ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा था कि वह घटनास्थल पर नहीं था। वह तो कई दिनों से बनवीर पुर गांव में ही था। इसके बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संज्ञान लिया और एसआईटी गठित की गई। उसके बाद से ही आशीष मिश्र मोनू ने मीडिया से दूरियां बना लीं। 9 अक्टूबर को जब एसआईटी की ओर से आशीष मिश्र मोनू पर शिकंजा कसा गया तब से मीडिया से लुकाछुपी का खेल शुरू हो गया। पुलिस लाइन में स्थित क्राइम ब्रांच में जब बुलाया गया तब मीडिया को धता बताते हुए पिछले दरवाजे से आशीष मिश्र मोनू को हाजिर कराया गया। उसके बाद जब उसे पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा गया तो भी गुपचुप तरीके से उसे वापसी दाखिला किया गया। 15 फरवरी को रिहाई के समय भी जिला जेल के मेन गेट के बजाय गुपचुप तरीके से पिछले दरवाजे से उसे बाहर निकाला गया था। इसी कड़ी में रविवार को भी वह गुपचुप तरीके से सीजेएम कोर्ट में हाजिर हो गया, जिसके बाद उसे पुलिस जिला जेल ले गई।
मीडिया कर्मियों को किया गया कोर्ट कैंपस से बाहर
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा मामले में प्रमुख आरोपी आशीष मिश्र मोनू के आत्मसमर्पण करने की खबर पाते ही पुलिस-प्रशासन सक्रिय हो गया। न्यायिक प्रशासन के साथ समन्वय बिठाते हुए मीडिया कर्मियों को कोर्ट कैंपस में घुसने से रोक दिया गया। गेट के बाहर ही मीडियाकर्मी आशीष मिश्र मोनू की कवरेज को जुटे रहे, लेकिन दूसरे रास्ते से निकाल दिया गया।
68 दिन ही खुली हवा में ली आशीष ने सांस
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा का मुख्य आरोपी आशीष मिश्र अपनी रिहाई के बाद 68 दिन ही खुली हवा में सांस ले सका। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सोमवार से पहले ही रविवार को आशीष ने कोर्ट के समक्ष सरेंडर कर दिया। यहां बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्र को एक सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश दिया था।
तीन अक्तूबर 2021 को तिकुनिया में हुई हिंसा में आठ लोगों की जान चली गई थी। इस पूरे मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के पुत्र आशीष मिश्र को मुख्य आरोपी बनाया गया था। इसके बाद नौ अक्तूबर 2021 को मामले की जांच कर रही एसआईटी ने पूछताछ के बाद मध्य रात्रि में आशीष की गिरफ्तारी की थी। आशीष समेत कुल 13 आरोपियों को जेल भेजा गया था, जिसमें से हाईकोर्ट लखनऊ पीठ ने 10 फरवरी 2022 को आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए सशर्त जमानत मंजूर की थी। अदालत व जेल की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 15 फरवरी 2022 को आशीष मिश्र जेल से बाहर आया था। इस दौरान करीब 128 दिन आशीष को जेल में बिताने पड़े थे, जबकि उसके अन्य साथियों की जमानत मंजूर नहीं हो पाई।
विधानसभा चुनाव तक यह प्रकरण ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद तिकुनिया हिंसा मामले में एक गवाह पर निघासन क्षेत्र में हमला हुआ था। इससे तिकुनिया हिंसा प्रकरण फिर से तूल पकड़ा और दूसरे पक्ष के लोगों ने आशीष की जमानत को निरस्त कराने केे लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चलने के दौरान ही रामपुर में एक गवाह पर हमला होने की बात सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल को आशीष मिश्र की जमानत को निरस्त करते हुए सात दिन के अंदर कोर्ट के सामने सरेंडर करने का फैसला सुनाया था, जिस पर मोहलत से एक दिन पहले ही उसने सरेंडर कर दिया।
तिकुनिया हिंसा-कब क्या हुआ
3 अक्तूबर- तिकुनिया हिंसा में हुए खूनी संघर्ष में चार किसान समेत आठ लोगों की मौत, देर रात रिपोर्ट दर्ज
7 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया
7 अक्तूबर को पहली गिरफ्तारी हुई, लवकुश और आशीष पांडे गिरफ्तार
9 अक्तूबर- आशीष मिश्र क्राइम ब्रांच में पेश हुए, देर रात गिरफ्तार
12 अक्तूबर-पत्रकारों और किसानों की आत्मा की शांति के लिए तिकुनिया में अंतिम अरदास हुई
13 अक्तूबर- अंकित दास और गनर लतीफ ने सरेंडर किया
15 अक्तूबर - अंकित दस के लखनऊ के फ्लैट से असलहे बरामद
18 अक्तूबर-सुमित जायसवाल समेत चार गिरफ्तार
19 अक्तूबर- घटना में इस्तेमाल स्कॉर्पियो बरामद
13 दिसंबर- जांच टीम ने अदालत में हादसे की धारा हटाकर जान बूझकर हत्या करने की धारा बढ़ाने की अर्जी दी
14 दिसंबर- सभी आरोपियों पर जांच टीम ने हत्या व हत्या की कोशिश की धारा बढ़ाई
20 दिसंबर- आशीष मिश्र समेत छह की जमानत अर्जी खारिज
3 जनवरी- एसआईटी ने सीजेएम अदालत में चार्जशीट दायर की
20 जनवरी- जिला अदालत में आशीष मिश्र समेत 12 आरोपियों की सुनवाई टली
21 जनवरी- जिला अदालत में आशीष मिश्र समेत 13 की सुनवाई के लिए 8 फरवरी तिथि मुक़र्रर
15 फरवरी को जेल से आशीष मिश्र की रिहाई हुई
18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्र की जमानत रद्द की
24 अप्रैल को आशीष मिश्र ने सरेंडर किया