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डीजल के बाद अब खाद मूल्यों में बढ़ोतरी से किसानों की परेशानी और बढ़ी

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लखीमपुर खीरी/ बांकेगंज। डीजल के बाद एनपीके और एनपी खाद के दाम बढ़ने से किसानों की कमर टूट गई है। खाद के दाम बढ़ने से खेती में लागत बढ़ जाएगी। जबकि फसलों का वाजिब मूल्य नहीं मिल रहा है। किसानों का कहना है कि भाजपा सरकार सिर्फ आय दोगुनी करने का सपना दिखा रही है।
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इफको ने नाइट्रोजन-फास्फोरस और पोटैशियम तत्वों के अनुपात से तैयार की गई एनपीके खाद के मूल्यों में बढ़ोत्तरी की है। एनपीके खाद 265 रुपये प्रति बोरी तक का इजाफा किया है। एनपीके 1185 से बढ़ाकर 1450 रुपये कर दी है। एनपीके के मूल्य में 265 रुपये प्रति बोरी इजाफा किया है। इसी तरह एनपी खाद के मूल्य में 70 रुपये बढ़ोत्तरी की गई है। अभी तक 1150 रुपये प्रति बोरी मिलने वाली एनपी खाद अब किसानों को 1220 रुपये प्रति बोरी मिलेगी। इस बढ़ोत्तरी से किसानों की उत्पादन लागत बढ़ जाएगी और उनका मुनाफा घटेगा। डीजल की मार झेल रहे किसानों के लिए यह बड़ा झटका है। खाद और डीजल मूल्यों में बढ़ोत्तरी के बीच किसानों की आर्थिक रीढ़ कही जाने वाली गन्ने की फसल का भुगतान न मिलने से तंगहाली से जूझ रहे मध्यम वर्गीय किसानों की नींद उड़ गई है।
पिछले दो वर्षों में लगातार बढ़ रही डीजल की कीमतों से किसानों की कमर पहले से ही टूटी थी, अब खाद के मूल्यों में बढ़ोत्तरी से उन्हें काफी घाटा होगा। साथ ही कृषि उत्पादन लागत में बढ़ोत्तरी होगी। - श्याम सुंदर शर्मा, किसान
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डीजल और खाद के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी से कृषि उत्पादन की लागत बढ़ती जा रही है। जबकि कृषि उपज के मूल्यों में उस दर से वृद्धि नहीं की जा रही है। इससे किसानों की आय लगातार घट रही है। - जतन सिंह, किसान
भाजपा सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दम भरती है। जबकि डीजल और खाद के दाम बढ़ने से किसानों की आय दोगुनी होने के बजाय आधी रह गई है। मंहगा डीजल और मंहगी खाद खरीदकर खेती-बाड़ी करना मुश्किल होगा। - नावेद खां, किसान
हर तरफ से किसानों पर वार हो रहा है। कृषि उत्पादन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। जबकि डीजल और खाद के मूल्यों में लगातार इजाफा हो रहा है। इससे किसानों की कमर टूट रही है। - डॉ. जहीर अहमद, किसान
खाद और डीजल के दामों में तो बढ़ोत्तरी हो रही है, लेकिन किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। न ही धान खरीद की व्यवस्था ठीक है और न ही चीनी मिल को बेचे गए गन्ने का भुगतान मिल रहा है। ऐसे में किसान परेशान हैं। - मनोज कुमार, किसान
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