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Lakhimpur Kheri News: 77 वर्षों बाद शत्रु संपत्ति पर मिला प्रशासन को कब्जा

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पाकिस्तानी खातेदार के नाम दर्ज खेतौनी। स्रोत प्रशासन
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धौरहरा। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय पाकिस्तान गए खातेदार की 116 बीघा जमीन पर काबिज होने के लिए प्रशासन को 77 वर्षों का समय लग गया। उस शत्रु संपत्ति पर भू-माफिया काबिज रहे और भूमि में लगे 49 पेड़ भी काट ले गए। हालांकि प्रशासन ने सात आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई है।
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भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय 1947 में भारत से पाकिस्तान गए और कुछ लोग पाकिस्तान से भारत आए थे। दोनों देशों की सरकारों ने बंटवारे के समय देश छोड़ कर गए लोगों की भूमि को शत्रु संपत्ति मान कर कब्जा कर लिया था। कुछ ऐसा ही मामला धौरहरा कस्बे का भी था। धौरहरा कस्बे के निवासी मोहम्मद सदद्दीक अहमद पुत्र निहाल भी बंटवारे के समय पाकिस्तान गए थे।
उनकी 116 बीघा भूमि अमेठी गांव में थी। यह जमीन बकायदा खतौनी पर खातेदार मोहम्मद सद्दीक अहमद निवासी वारिद हाल पाकिस्तान दर्ज थी। अक्तूबर 24 में जब चकबंदी अधिकारी के समक्ष उस भूमि की वरासत कराने के लिए धौरहरा कस्बे के कुछ लोगों ने दावेदारी की तो हाल पता पाकिस्तान देख चकबंदी विभाग हरकत में आया।
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चकबंदी अधिकारी ने 28 अक्तूबर को अपने आदेश में वरासत को बलहीन मानते हुए भूमि को राज्य सरकार में निहित कर दिया।
इस आदेश के दो महीने बाद तक जब भूमि को प्रसाशन ने कब्जा मुक्त नहीं कराया तो धौरहरा तहसील के अधिवक्ताओं सहित हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन करते हुए अवैध कब्जा हटवाने की मांग की।
जिस पर तहसीलदार आदित्य विशाल ने 16 दिसंबर तक भूमि से कब्जा स्वत: छोडने की नोटिस अवैध कब्जा धारकों को दी। पर इस दौरान उस भूमि में लगे 49 पेड़ भी चोरी से काट लिये गए।
मामले में एसडीएम के आदेश पर सात लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई। शनिवार को तहसीलदार आदित्य विशाल सीओ प्रीतम पाल सिंह, प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और शत्रु संपत्ति से अबैध कब्जेदारों को बेदखल कर भूमि पर कब्जा लेकर भूमि को प्रबंध समिति अमेठी के सुपुर्द कर दिया।
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