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खुदाई में लगे मजदूर बन गए हैं ‘वीआईपी’

Mon, 21 Oct 2013 03:24 PM IST
अविनाश बाजपेई, वीरेंद्र विक्रम/उन्नाव
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उन्नाव के एक प्राचीन किले में जारी सोने की खुदाई ने कुछ मजदूरों को रातोंरात फिल्म स्टार जैसा वीआईपी बना दिया है।
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पुरातत्व विभाग की टीम के साथ खुदाई में लगे गांव के लेबर भी इस समय ‘खासमखास’ हो गए हैं। समय से आना, टीम के साथ निकल जाना, बहुत कुरेदने के बाद भी कुछ न बताना, यही इन लेबरों की दिनचर्या में शामिल हो गया है।

चेहरे पर गंभीर भाव और चुप्पी साधने वाले ये मजदूर तीन दिन पहले तक खुद ही किले के तमाशबीन थे। रविवार को किला परिसर में 21 लोग खुदाई में लगे थे।

इनमें एएसआई टीम के नौ सदस्य और 12 लेबर शामिल थे। यह सभी लेबर डौंडिया खेड़ा गांव के ही हैं, लेकिन ये अंदर के बारे में मीडिया तो दूर गांव वालों को भी नहीं बता रहे हैं।
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स्थिति यह है कि आस-पड़ोस के लोग भी रात में इनके घर पहुंच कर किले के अंदर की गतिविधि जानने की कोशिश कर रहे हैं।

तीन चक्र का सुरक्षा घेरा बनाया गया किला
किले को अभेद्य बना दिया गया है। तीन सुरक्षा घेरों में किले को रखा गया है। प्रशासन ने किला परिसर में खुदाई वाले स्थान को काले रंग की पालीथिन से घेर दिया है।

यानी बाहर तैनात पुलिसकर्मी भी अब खुदाई की गतिविधियां नहीं देख पाएंगे। किला परिसर में खुदाई वाले स्थान से थोड़ी दूर चारों ओर चार सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं।

गंगा नदी से बिलकुल सटकर बने किले के एक ओर की सुरक्षा गंगा करती थीं। दो तरफ से घने जंगल और एक ओर से राव साहब की सेना किले की ओर आने वाले दुश्मनों का मुंह तोड़ जवाब देने के लिए हर समय तैयार रहती थीं।

अब सबसे पहले पुलिस के जवानों को लगाया गया है। इसके बाद पीएसी के जवान दूसरे घेरे की कमान संभाले हुए हैं। तीसरा घेरा भी पीएसी के जवानों का ही है लेकिन यह काफी तेज-तर्रार जवान माने जाते हैं।

पल-पल की चौकसी के बीच बाहरी तत्वों का किला परिसर में घुसना असंभव माना जा रहा है। किले में स्वर्ण भंडार की खबर सामने आने के बाद जो गांव वाले समिति के सामने खुदाई की मांग कर रहे थे, उनकी कौन कहे खुद उनके अगुआ यानी ग्राम प्रधान संग्रामपुर को भी किला परिसर में घुसने की इजाजत नहीं है।

आस्था की नींव पर सपने की इमारत
आस्था की नींव पर सपने की इमारत खड़ी हो रही है। फिलहाल यह इमारत खुली आंखों से देखे गए सपने पर बन रही है इसलिए इसके गिरने की सोच पाप के समान मानी जा रही है।

संत शोभन सरकार की वाणी पर खींचे जा रहे विकास के इस अंतहीन खाके पर लोग बड़ा आदमी बनने का ताना-बाना बुन रहे हैं।

भले ही एएसआई को तीन दिन की खुदाई में कुछ न मिला हो लेकिन इलाके के लोगों को खुदाई से पहले ही मानों सब कुछ मिल गया है।

संत शोभन सरकार में अगाध श्रद्धा रखने वाले यह मानने को तैयार नहीं हैं कि राव राम बक्स सिंह के किले से स्वर्ण भंडार नहीं मिलेगा। अब भी वही बात हो रही है, ‘1000 टन स्वर्ण भंडार से दस ग्राम भी कम नहीं मिलेगा, ज्यादा भले मिल जाए’। यानी आस्था कुलाचे भर रही है।

जमीन के नीचे अभी स्वर्ण भंडार कितने फीट पर है, है या नहीं है चर्चा इस आस्था के सामने तनिक भी नहीं टिक पा रही है कि संत शोभन सरकार ने स्वर्ण भंडार मिलने को कहा है।
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ग्राम प्रधान अजय पाल सिंह का कहना है कि लेबरों को हिदायत है कि वह अंदर चल रही गतिविधियों के संबंध में बाहर किसी को न बताएं।

उधर, कुछ ग्रामीणों का कहना है कि लेबरों को कोई जानकारी देने के बाद कानूनी पचड़े में फंस जाने का भय दिखाया गया है। इसलिए वह चाह कर भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं।
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