पडरौना। इस रक्षाबंधन पर जिले में इको-फ्रेंडली राखी की धूम होगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन यानी एनएएलएम के तहत समूह की महिलाओं को इको-फ्रेंडली राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर आवेदन मांगे गए हैं। बाजार की मांग के अनुसार महिलाएं राखी बनाकर अच्छी आय भी कमा सकेंगी।
प्लास्टिक और रासायनिक रंगों वाली राखी के विकल्प के तौर पर अब जिले में पर्यावरण मित्र राखी तैयार की जाएंगी। एनएएलएम के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए यह पहल की गई है। डीसी एनआरएलएम फैजल आदल ने बताया कि रक्षाबंधन से पहले महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इको-फ्रेंडली राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए सभी ब्लॉकों में आवेदन मांगे गए हैं। इच्छुक समूह की महिलाएं 10 अगस्त तक ब्लॉक कार्यालय में आवेदन कर सकती हैं।
उन्होंने बताया कि एनआरएलएम की तरफ से होने वाले प्रशिक्षण में महिलाओं को केले का रेसा, बीज, कपास के धागे, जूट, सूखे फूल, कागज और प्राकृतिक रंगों से राखी बनाना सिखाया जाएगा। यह राखी न सिर्फ सुंदर होंगी, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होंगी। कुछ राखियों में तुलसी और सब्जी के बीज भी लगाए जाएंगे, जिन्हें बाद में मिट्टी में लगाया जा सकेगा। प्रशिक्षण के बाद समूह की महिलाएं बाजार की मांग के हिसाब से राखी बनाएंगी। इन्हें जिला प्रशासन की मदद से सरकारी कार्यालयों और मेला व प्रदर्शनी में बेचा जाएगा।