पटहेरवा। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान और भक्ति का समुद्र है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से जीवन में सुख का संचार होता है। ईश्वर हर जगह विद्यमान है उनकी कृपा से सृष्टि चल रही है।
ये बातें कथा वाचक प्रवीणानंद महराज ने कही। वे क्षेत्र के पड़री मेंहदिया बुजुर्ग गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत पुराण महायज्ञ में कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्ञान और वैराग्य को जागृत करने के लिए श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के भीतर का मनोविकार दूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि भक्ति वह वैराग्य है, जो भक्त को हर बंधन मोह माया से विरक्त करते हुए सीधे ईश्वर को समर्पित रहता है। भगवान निर्गुण और निराकार है वह भक्त सच्चे मन और कर्म से जिस रूप में उन्हें खोजता है ईश्वर उन्हें उस रूप मिलते है। व्यासपीठ का पूजन कर कथा का शुभारंभ करते हुए देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि यज्ञ और पूजा से लोगों में धर्म और कर्म की सीख मिलती है। इससे समाज में एकता और भक्ति भावना की जागरूकता बढ़ती है। इस दौरान संदीप तिवारी, अमलेश तिवारी, अभिषेक तिवारी, सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, डॉ. शुभकर शुक्ला, अरविंद सिंह आदि मौजूद रहे।