माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ओर से आए को नोटिस दिखातीं महिलाएं। संवाद
पडरौना। फर्जी आईडी की मदद से एक दंपती ने कई माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लोन दिलवाया। लोन दिलवाने के बाद इन महिलाओं से दंपती ने रुपये ले लिया और एक साल में दोगुना कर वापस करने तथा किश्त भी नहीं भरने का लालच दिया। करीब चार माह बाद 50 लाख से अधिक रुपये लेकर दंपती गायब हो गए। इसके बाद एजेंट महिलाओं के घर पहुंचकर किस्त जमा करने के लिए दबाव बनाने लगे। इसको लेकर एजेंट और महिलाओं के बीच विवाद भी हुआ था।
महिलाएं एक साथ तत्कालीन एसपी के पास पहुंची तो पांच लोगों पर केस दर्ज हुआ था। इसमें दंपती समेत एक फाइनेंस कंपनी का वर्कर भी जेल भेजा गया जो फर्जी आईडी बनाकर लोन दिलाने में मदद करता था। बावजूद इसके महिलाएं अभी भी फाइनेंस कंपनियों की कर्जदार बनी हुई हैं। नोटिस मिला और एजेंट पहुंचकर लोन जमा करने के लिए धमका रहे हैं। ठगी की शिकार हुई दुदही नगर की महिलाएं एजेंटों की प्रताड़ना आज भी झेल रही हैं। विशुनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही नगर समेत आसपास के गांवों की 40 से अधिक महिलाओं को चाय की दुकान चलाने वाले एक दंपती ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर अलग-अलग माइक्रो फाइनेंस कंपनी के वर्करों से मिलकर करीब 50 लाख से अधिक लोन दिलाया। एक साल में दोगुना रुपये वापस करने और किस्त जमा नहीं करने का झांसा देकर दंपती रकम लेकर फरार हो गया था। समूह के एजेंट जब वसूली करने पहुंचे तो महिलाओं को इसकी जानकारी हुई। मामला पुलिस तक पहुंचा। तत्कालीन एसपी ने गंभीरता से लिया और जालसाजी करने के वाले दंपती पर मार्च 2024 में केस दर्ज विशुनपुरा थाने में हुआ। विशुनपुरा थाने की पुलिस व साइबर थाने की संयुक्त टीम ने गगलवा नहर पुल के पास से फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर समूह से लाखों रुपयों के लोन का फर्जीवाड़ा करने वाले गैंग के मुख्य आरोपी चाय दुकानदार अशोक कुमार मद्धेशिया, इसकी पत्नी गुड्डी देवी निवासी दुदही थाना विशुनपुरा, आरोहण बैंक के कर्मी मेहताब आलम निवासी सरया थाना गढ़वाल जनपद बलिया, कर्मी राकेश कुमार निवासी दुर्गापुर दोडीहवां थाना बृजमनगंज महराजगंज व दीपक केशरी निवासी साहबगंज उत्तरी कोतवाली पडरौना को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जालसाजी की शिकार हुई मधु, सलहंती, सावित्री, गुलाबी, सुनीता, पूनम, विद्यावती ने बताया कि आज भी मोबाइल पर लोन जमा करने के लिए मैसेज आ रहा है और नोटिस भी आया है। बीच में कुछ फाइनेंस कंपनियों का लोक अदालत से भी नोटिस आया था, लेकिन मजदूरी कर पेट भरने से पैसा बचे तब न कोई भरे। आरोपी दंपती जेल से रिहा होकर चले आए हैं और रुपये मांगने पर बोलते हैं मुकदमा चल रहा है।