पडरौना। गेहूं की खरीदारी के लिए जिले में तैयारी तेज कर दी गई है, लेकिन अभी 1.7 करोड़ रुपये का भुगतान 60 से अधिक किसानों का फंसा है। इसके लिए किसान डिप्टी आरएमओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो रही है। कार्यालय में मौजूद बाबू बैंक खाते का एनपीसीआई नहीं होने के कारण भुगतान नहीं होने की बात कह अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। इसको लेकर किसान परेशान हैं।
जिले में लक्ष्य के सापेक्ष अधिक धान की खरीदारी हुई थी, लेकिन धान बेचने वाले किसानों का तय समय के अंदर भुगतान नहीं हो सका। इसके लिए धान बेचने के बाद से किसान डिप्टी आरएमओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। गेहूं खरीदारी की तैयार में जोर शोर से जिम्मेदार जुट गए हैं, लेकिन धान बेचने वाले किसानों के भुगतान के लिए कोई पहल नहीं कर रहे हैं। जिले के 60 से अधिक किसानाें का भुगतान फंसा है। किसानों का कहना है कि बैंक में जाकर खाते का एनपीसीआई करा दिया गया है। अगर विभाग की ओर से धान बेचने की रकम खाते में नहीं भेजी गई तो मार्च में पैसा वापस चला जाएगा और फिर भुगतान कुछ दिन के लिए लटक जाएगा। इसी गड़बड़ी के चलते किसान अपनी कमाई मजबूरी में बिचौलियों को बेचते हैं। बैंक खाते की कोई भी गड़बड़ी हो इसके विभागीय स्तर पर ठीक करना चाहिए या धान बेचने से पहले ही किसानों को बता देना चाहिए। जिम्मेदारों की उदासीनता से किसान धान बेचकर खुद बिका हुआ महसूस कर रहे हैं। गेूहं की खेती के लिए कर्ज लेना पड़ा। डिप्टी आरएमओ नरेंद्र तिवारी ने बताया कि 100 से अधिक किसानों का भुगतान फंसा था। जिनका बैंक खाता एनपीसीआई हो गया है। उनके खाते में पैसा जा रहा है। इसी महीने में पूर्ण भुगतान कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए किसानों के संपर्क में क्रय केंद्र प्रभारी हैं।