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विशेषज्ञ डॉक्टरों के फर्जी बोर्ड लगाकर मरीजों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़

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विशेषज्ञ डॉक्टरों के फर्जी बोर्ड लगाकर मरीजों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़
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- लापरवाही पूर्वक इलाज के चलतेआठ वर्षों में 20 से अधिक लोगों की जा चुकी है जान
संवाद न्यूज एजेंसी
दुदही (कुशीनगर)। विशुनपुरा थाना क्षेत्र में ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो क्लीनिक या मेडिकल स्टोर खोलकर बैठे हैं। यही नहीं वे लोग वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर खुद ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। ऐसे लोगों की लापरवाही से मरीजों की जान खतरे में पड़ जा रही है। इस लापरवाही से इलाज होने से बीते आठ वर्षों में 20 से अधिक मरीजों की जान भी जा चुुकी है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
चिकित्सा की पढ़ाई से संबंधित उपाधि का बोर्ड लगाकर दुदही क्षेत्र में गरीब लोगों को लंबे समय से ठगा जा रहा है। कम पढ़े लिखे और सुविधाविहीन ये लोग बोर्ड पढ़कर ही इन अस्पतालों के चक्कर में पड़ जा रहे हैं। इसके चलते इन गरीबों को रुपये की साथ अपने प्रियजन को भी खोना पड़ रहा है। कस्बे के निवासी व सामाजिक कार्यकता मनोज कुंदन, सुनील यशराज, राजेश गुप्ता, गौरीश्रीराम निवासी मिथलेश पटेल, गुलाब आदि ने कहा कि जब घटनाएं होती हैं, तब कस्बे में संचालित इस तरह के अस्पतालों को सील कर दिया जाता है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की सांठगांठ से सील अस्पतालों को खोल दिया जाता है। क्षेत्र में काफी संख्या में इस तरह के अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
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......केस -एक
पहली घटना 15 मार्च वर्ष 2017 की है। क्षेत्र के गौरीश्रीराम के टोला माधोपुर निवासी जयराम कुशवाहा की 20 वर्षीय पत्नी गुड़िया गर्भवती थी। प्रसव पीड़ा होने पर जयराम उसे गांव के एएनएम सेंटर पर ले गए, जंहा एएनएम चार घंटे रखने के बाद सीएचसी के बजाय दुदही सुराजी बाजार रोड पर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में भेज दिया। वहां अप्रक्षित चिकित्सक ने ऑपरेशन से प्रसव कराने का प्रयास किया गया। लेकिन जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। नाराज परिजन करवाई की मांग को लेकर सड़क जाम किया, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और अस्पताल सील कर एएनएम शैल कुशवाहा, उनके पति उमेश कुशवाहा और अस्पताल के दो चिकित्सकों पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया। जांच में अस्पताल पंजीकृत नहीं पाया गया। उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को खोल दिया।
.......केस दो
यह घटना 25 अक्टूबर 2012 की है। पडरौन मड्डरही जिरात निवासी गुड्डू वर्मा दुदही सुराजी बाजार रोड स्थित एक निजी अस्पताल की है। गुड्डू की पत्नी बबिता को प्रसव पीड़ा हुई। एक आशा कार्यकर्ता उसे बहला फुसला कर सीएचसी ले जाने की बजाय, एक प्राइवेट अस्पताल पर ले गई। जहां ऑपरेशन में जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। इसके बाद परिजन अस्पताल में तोड़फोड़ कर सड़क जाम कर दिया। मौके पर पहुंचे एसडीएम और सीओ ने लोगों को समझाबुझाकर किसी तरह जाम समाप्त कराया। यहां भी जांच में अस्पताल फर्जी मिला। गुड्डू के तहरीर पर चिकित्सक गोरख प्रसाद, आशा कार्यकर्ता किशोरी मिश्रा और एक महिला स्टॉप व एक पुरुष चिकित्सक समेत चार लोगों पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर अस्पताल सील कर दिया था।
केस- तीन
चार मार्च वर्ष 2021 को विशुनपुर बरिया पट्टी गांव निवासी बुधई की पत्नी कुसुम देवी के पेट में दर्द हुआ। गांव की आशा उसे सीएचसी ले जाने की बजाय दुदही टैक्सी स्टैंड के पास संचालित एक प्राइवेट अस्पताल ले गई। वहां चिकित्सक ने गम्भीर बीमारी बता कर बच्चेदानी का ऑपरेशन करने लगे। ऑपरेशन के दौरान ही महिला की मौत हो गई। इसके बाद सभी अस्पताल कर्मी अस्पताल छोड़ कर भाग निकले। हंगामा और धरना प्रदर्शन के बाद पुलिस पहुंची। शव कब्जे में लेकर पुलिस कार्रवाई में जुट गई। इसके बाद मृतक महिला के दमाद रमानंद गुप्ता की तहरीर पर अस्पताल और उसके कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया। जो अब धड़ल्ले से चल रहा है।
....केस- चार
घटना जुलाई 2016 की है। बतरौली धुरखड़वा निवासी राजेंद्र गुप्ता बीमार थे। गौरीश्रीराम में बंगाली डॉक्टर की गलत इलाज के चलते इलाज के दौरान ही राजेंद्र की मौत हो गई। तोड़फोड़ हंगामा के बाद सीओ और एसडीम समेत चार थानों की फोर्स पहुंची। जांच में अस्पताल अवैध पाया गया। अस्पताल सील करते हुए बंगाली डॉक्टर समेत दो लोगों पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। कुद दिन बाद इस अस्पताल को पुन: खोल दिया गया है।
इनकी भी गई जान
इसके अलावा बांसगांव बैरिया निवासी रूबी यादव की प्रसव के दौरान मौत हो गई, जंगल घोरठ निवासी गुड़िया की प्रसव के दौरान मौत हो गई। बांसगांव घुरपट्टी निवासी, सरस्वती देवी की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई। विशुनपुर बरिया पट्टी मंजू की प्रसव के दौरान मौत हो गई। पडरौन मडुरहीं निवासी सुनीता खरवार की गलत इलाज के दौरान मौत हो गई। बरवा बभनौली की शांति की मौत प्रसव के दौरान हुई।
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ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ अभियान चलाकर करवाई की जा रही है। दस दिन पहले ही तीन अस्पताल सील कर कई अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया है।
डॉ. एके पांडेय, प्रभारी चिकित्साधिकारी, दुदही
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