पडरौना। महाकुंभ में भगदड़-भीड़ और भूख-प्यास के बीच रविवार को घर पहुंचे श्रद्धालुओं को अपना शहर देख उनके चेहरे पर खुशी का अलग भाव दिखा। यात्रा करते-करते उनका बदन थक हारकर चूर होने के बाद भी अपनों को देख वह उत्साहित हो गए।
धक्का-मुक्की के बीच अपने शहर पहुंचने के बाद उनके जान में जान आई। उनका कहना था कि ऐसी यात्रा कभी नहीं की, महज प्रयागराज से घर आने में चार से पांच दिन लग गए।
लगातार पांच दिन भटकने के बाद अपने शहर लौटे श्रद्धालुओं की आपबीती जिसने भी सुनी वह आश्चर्य में पड़ गया। लोगों ने बताया कि बीते 28 जनवरी की आधी रात के बाद महाकुंभ में भगदड़ का दृश्य आंखों से ओझल नहीं हो रहा है। साथ चल रहे गांव और परिवार के लोग कब कहां गायब हो गए, कुछ पता ही नहीं चला। दुदही क्षेत्र के ठाढ़ीभार निवासी उमेश पांडेय, हाटा क्षेत्र के धर्मपुर निवासी छेदी मिश्र ने बताया कि मेला में धक्का-मुक्की ऐसी कि एक रास्ते से दूसरे रास्ते पर पहुंच जा रहे थे। मेला में जो जहां पहुंचा, वहीं फंस गया। अपनों का साथ तो एक झटके में छूट गया। न जाने कितने लोग अभी अपनों की तलाश में प्रयागराज में भटक रहे हैं। परिवार के साथ गए कई लोग भीड़ में अकेले हो गए।
15 से 20 किलोमीटर से पैदल चलकर किसी तरह बस मिली। पुलिस वालों के सहयोग से बस में तो बैठ गए, लेकिन रास्ते-रास्ते में जगह जाम मिला। एक जगह जहां बस खड़ी हो जा रही थी, वहां से चार से पांच घंटे बाद ही आगे बढ़ रही थी। मछलीशहर, जौनपुर, मऊ और आजमगढ़ में सबसे अधिक भीड़ मिली। आजमगढ़ तक पहुंचने में ही लोगों को काफी समय लग गया। रात में गोरखपुर पहुंचे थे। इसके बाद सुबह पडरौना तक आया हूं।