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संसाधन ही नहीं, कैसे पकड़े जाएंगे हिंसक वन्यजीव

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संसाधन ही नहीं, कैसे पकड़े जाएंगे हिंसक वन्यजीव
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डंडे के सहारे वन्यजीवों में काबू करते हैं वन विभाग के कर्मी
बाघ के हमले के बाद रिहाइशी इलाकों में रहने वाले लोग सहमे
खड्डा(कुशीनगर)। तहसील क्षेत्र से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, महराजगंज के सोहगीबरवां वन्य जीव अभयारण्य और नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान के जंगलों से हिंसक वन्यजीव रिहाइशी इलाके में आकर लोगों पर जानलेवा हमला कर रहे हैं। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में दहशत है। शुक्रवार को बाघ के हमले से एक महिला की मौत के बाद लोग भयभीत हैं, लेकिन वन विभाग के पास ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए संसाधन है न प्रशिक्षित कर्मचारी। डंडे के सहारे वन्यजीवों को काबू करने की कोशिश की जाती है।
वर्ष 1973 में स्थापित 952.66 वर्ग किमी में फैले नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान को वर्ष 1984 में विश्व धरोहर घोषित किया गया था। बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व वर्ष 1978 में वन सेंचुरी घोषित किया गया। यह 899.38 वर्ग किमी में है। 1987 में सोहगीबरवां वन्यजीव अभयारण्य बना। इन तीनों की सीमा आपस में जुड़ी व खुली हैं। इनमें बाघ, तेंदुआ, भालू, गैंडा, जंगली भैंसा, अजगर सहित कई प्रजातियों के हिरण व अन्य जानवर रहते हैं। खड्डा तहसील क्षेत्र एवं आंशिक पडरौना क्षेत्र में फैले खड्डा वन क्षेत्र की सीमा बीटीआर व सोहगीबरवां वन क्षेत्र से जुड़ी है। इस क्षेत्र से गंडक नदी गुजरती है। जंगलों की सीमा खुली होने के चलते वन्यजीव रिहाइशी इलाके में पहुंच जाते हैं। दो साल में खड्डा इलाके में वन्यजीवों के हमले में दो लोगों की जान चली गई। जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। एक सप्ताह के अंदर बिहार में एक महिला व एक किशोर की मौत बाघ के हमले में हो गई है।
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उधारी के सामान पर चलता है काम
जंगलों से सटे खड्डा क्षेत्र में हिंसक वन्यजीवों को पकड़ने के लिए वन विभाग के पास संसाधन नहीं हैं। वर्तमान में वन कार्यालय पर एक रेंजर, दो वन दरोगा, दो वन सुरक्षा कर्मचारी व चार माली की तैनाती है। हालांकि दो बंदूक जरूर है। वन्यजीवों को काबू में करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी एवं जरूरी वाहन, उपकरण, ट्रेंकुलाइजर गन, हेलमेट, बाडी प्रोटेक्टर, ट्रैकर, ड्रोन कैमरा आदि की व्यवस्था नहीं है। जानवरों को काबू करने के लिए महराजगंज व गोरखपुर पर निर्भर रहना पड़ता है।
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वन्यजीवों के हमले की बानगी
दिसंबर 2020 मेें खड्डा क्षेत्र के भैसहां गांव के कोटवा टोला में तेंदुआ के हमले में छह वर्षीय आरती की मौत हो गई थी। 30 वर्षीय सीमा घायल हो गई थी। अक्तूबर 2021 में खड्डा क्षेत्र के मदनपुर सुकरौली गांव की 60 वर्षीय कोईली देवी को तेंदुआ ने मार डाला था। मार्च 2021 में खड्डा क्षेत्र के लखुआ लखुई गांव में घुसे तेंदुआ ने सात लोगों को घायल कर दिया था। इसके दो दिन बाद भेड़ी जंगल गांव में सुकई व नथुनी को घायल कर दिया था। उसे पकड़ने के प्रयास में रेंजर बीके यादव व फारेस्टर शत्रुघ्न ठाकुर घायल हो गए थे।
जनवरी 2021 में शिवपुर गांव में तेंदुआ ने हमला कर एक महिला व एक पुरुष को घायल कर दिया था। बाद में तेंदुआ की मौत हो गई थी। वर्तमान एक सप्ताह में बिहार के चिउटहा वन क्षेत्र में बाघ के हमले में एक किशोर व महिला की मौत हो गई।
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कोट
जंगल करीब होने के चलते वन्यजीव भटककर रिहाइशी इलाके में आ जाते हैं। जब कोई व्यक्ति या जानवर सामने पड़ता है तो शिकार समझकर हमला कर देते हैं। हमारे पास संसाधन व प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है। आपात स्थिति मेंअन्य जनपदों से मदद ली जाती है। एक पिंजरा मंगाया गया है। लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
बीके यादव, रेंजर
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