गंडक नदी पर पुल न होने से जान जोखिम में डालकर किसान कर रहे खेती
- पिपराघाट से अहिरौलीदान के बीच गंडक नदी पर नहीं है कोई पुल
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। बड़ी गंडक नदी पर अब तक कोई पुल न बनने और रबी की फसलों की बुवाई को लेकर एपी बांध के किनारे बसे कई गांवों के किसानों को जान जोखिम में डालकर नदी उस पार खेती करनी पड़ रही है। उनके लिए नदी उस पार जाने के लिए नाव ही सहारा है। नाव का संतुलन बिगड़ने या अन्य कारणों से अक्सर ही हादसे हो रहे हैं, लेकिन इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा रहा है।
सेवरही विकास खंड के नरवाजोत से अहिरौलीदान तक लगभग 20 किलोमीटर की लंबाई में एपी बांध से सटे गंडक नदी बहती है। नदी के उस पार दहारी टोला, मोतीराय टोला, नरवाजोत, तवकल टोला, जंगली पट्टी, बिनटोली, घघवा जगदीश, जवही दयाल, चैनपट्टी, बिरवट कोंहवलिया, बाकखास, गौराहा, खैरटिया, फागू छापर, बाघाचौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला, डीह टोला और अहिरौलीदान सहित अन्य कई गांवों के सैकड़ों किसानों के खेत हैं। इस समय सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की फसल खड़ी है। बाढ़ व रोग के चलते अधिकांश फसल बर्बाद हो चुकी है। इस समय किसान बची खुची गन्ने की कटाई करने में जुटे हैं ताकि उनकी जगह रबी की फसलों की बुवाई कर सकें। लेकिन इस क्षेत्र में नदी पर कोई पुल नहीं होने से गन्ने की कटाई के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से उन्हें बड़ी नावों से इस पार लाना जान जोखिम में डालने जैसा है। इससे प्राय: दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
क्षेत्र के गन्ना किसान आनंद सिंह, योगेंद्र निषाद, संजय सिंह, मैनेजर चौरसिया, पप्पू यादव और गौतम सिंह आदि का कहना है कि इस साल भी गन्ने की आधी फसल रोग व बाढ़ के चलते बर्बाद हो चुकी है। इस वजह से चीनी मिल के चलने की संभावना मध्य फरवरी तक है। ऐसे में उनकी कोशिश है कि जितना जल्दी हो सके, वह अपना गन्ना चीनी मिल में भेज दें और समय पर रबी की फसलों की बुवाई कर सकें। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में गंडक नदी पर जब तक पुल नहीं बनेगा, किसानों का जीवन खतरे में रहेगा।