कुशीनगर महोत्सव : बरवा राजापाकड़ के बहुरिया टोला में गूंजे भक्तिगीत व शास्त्रीय संगीत
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। कुशीनगर महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार की रात बरवा राजापाकड़ गांव के बहुरिया टोला स्थित हनुमान सरोवर में भक्ति गीत, लोक गायन, शास्त्रीय संगीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लोगों ने भरपूर मनोरंजन किया। वहीं, दर्शकों ने कलाकारों की मनभावन प्रस्तुतियों पर तालियों के साथ उनकी हौसलाअफजाई की।
विधायक गंगा सिंह कुशवाहा ने कहा कि कुशीनगर महोत्सव के आयोजन से उन स्थलों का महत्व बढ़ा है, जहां कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। विशेषकर बांसी नदी की महत्ता के बारे में भी जानने का अवसर मिला। उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के उपाध्यक्ष राजेश्वर सिंह ने ऐसे आयोजन को सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व का बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए। इस कार्यक्रम को हियुवा के जिला संयोजक चंद्रप्रकाश चमन, ओपी मिश्रा व सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मुहम्मद इलियास अंसारी सहित कई लोगों ने संबोधित किया।
इसके बाद सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ हुआ। गायिका मुस्कान ने छठ पर आधारित गीत ‘शीतले बेयरिया, शीतले पूजे पनिया...’सुनाया। गोल्डी शर्मा ने ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना’ प्रस्तुत कर श्रद्घालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गायक प्रदीप लाल यादव, भोजपुरी गायक विपिन यादव, रविशंकर पाठक ने गीत प्रस्तुत किया।
रवि पाठक के प्रेम सौंदर्य पर आधारित गीत ‘ओ मीरा प्रेम दीवानी, काहे तेरी अंखियों में पानी..’ पर श्रद्धालुओं ने खूब ताली बजाईं। इसी तरह दिनेश तिवारी और सुनील मिश्र ने भजन प्रस्तुत किए। शास्त्रीय गायन को मणि सिस्टर्स ने ‘ॐ गणपतये नमो नम:’, छठ आधारित ‘कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...’‘घर में पधारों गजानन...’ आदि गीत प्रस्तुत किया। आयोजक विनय राय ने सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर धनंजय राय, कुश कुमार, अरविंद राय, तुर्कपट्टी थाने के एसओ जय प्रकाश पाठक, प्रधान प्रतिनिधि मुन्नीलाल गोंड, लाल बिहारी पटेल, केदार वर्मा, बैरिस्टर प्रसाद, शैलेंद्र तिवारी, दीपक गोंड, सूरज सिंह, सौरभ मिश्र, जयराम रावत सहित अन्य लोग मौजूद थे।
बरसाने की होली में बरसीं फूलों की पंखुड़ियां
गुरवलिया बाजार। कुशीनगर महोत्सव के चौथे दिन राजापाकड़ के हनुमान सरोवर में मंगलवार देर रात रासलीला में बरसाने की होली का आयोजन हुआ। इस दौरान बरसाने का दृश्य साकार हो उठा। मथुरा से आए शुभम और उनके समूह के कलाकारों ने देर रात बरसाने में फूलों की होली की प्रस्तुति कर सभी को झूमने पर विवश किया। साथ ही भगवान कृष्ण के कई रूपों की छटा बिखेरी गई। इस दौरान राधा-रानी ने भगवान श्रीकृष्ण से मयूर नृत्य देखने की इच्छा जताई। इस पर राधा को खुश करने के लिए भगवान ने लीला रचकर मोर नृत्य शुरू कराया। भगवान कृष्ण गोपियों के बीच खड़े नजर आए। इसके बाद बरसाने में हुई लट्ठमार होली और अंत में फूलों की होली खेली गई। इसमें भगवान कृष्ण और राधा को गोपियों ने गेंदा और गुलाब के फूलों से ढक दिया। यह दृश्य काफी मनोहारी था। इसके बाद भगवान कृष्ण के जयकारे से पूरा पंडाल गूंज उठा। गांव के लोग भाव विभोर होकर गेंदा, गुलाब और अन्य सुगंधित फूलों की पंखुड़ियों को टोकरियों में भरकर श्रीकृष्ण और राधा के ऊपर डाल रहे थे। वहीं, महिलाएं गीत गाकर माहौल को और खुशनुमा बना रही थीं। फूलों की होली खेलने के लिए दूर-दूर से लोग आए थे। फूलों से पंडाल पट गया था।