पडरौना। आधा अधूरा कार्य कराकर गोरखपुर के एक चहेते फर्म को 14 करोड़ रुपये का भुगतान जल निगम ग्रामीण के जिम्मेदारों की मिलीभगत से करने का मामला प्रकाश में आया है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने डीएम से शिकायती की है।
डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच बैठा दी है। तीन सदस्यीय टीम इसकी जांच कर रही है। आरोप है कि वर्ष 2022-23 में इसका टेंडर हुआ था। काम अधूरा होने के कारण भुगतान रूका था, लेकिन विभागीय जिम्मेदारों ने भुगतान गोरखपुर के एक फर्म को किया है।
ग्रामीणों को शुद्ध जल मुहैया कराने के लिए न्यू रेट्रोफीटिंग स्कीम 2023 के तहत जिले में 29 करोड़ की लागत से करीब 50 योजनाओं की स्वीकृति मिली थी। गांवों में पाइप लाइन और पानी की टंकी का भी निर्माण कराना था। यह कार्य कराने के लिए गोरखपुर के एक फर्म को ठेका मिला लेकिन अधिकांश गांवों में आधा अधूरा कार्य कराया गया है।
इन गांवों में आज भी पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। बीच में शिकायत पर इस फर्म का भुगतान रूका था लेकिन फर्जी दस्तावेज की मदद से कुशीनगर के जल निगम ग्रामीण के एक्सईएन की मिलीभगत से 14 करोड़ रुपये का भुगतान करा कर दिया गया है।
बाकी रुपये का भुगतान कराने के लिए ठेकेदार लगा है। सिधुआ बांगर भाठ जानकी नगर के रहने वाले अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला का आरोप है कि जिले में लागू हुई परियोजना को बिना पूरा कराए विभागीय अधिकारी मिलकर सरकारी धन का बंदरबांट किए हैं। बिना ग्राम प्रधान से नोआब्जेक्शन नहीं लिया गया है।
गांव वालों का फर्जी आधार कार्ड दूसरे गांवों की परियोजना में लगाकर ऑनलाइन फीडिंग कराया गया है। डीएम ने सीडीओ को जांच का निर्देश दिया है। जांच टीम में जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी और सिंचाई विभाग के एक्सईएन शामिल हैं।
एक सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट टीम को देना है। जल निगम ग्रामीण के एक्सईएन आतीफ हुसैन का कहना है कि टेंडर मेरे कार्यकाल में नहीं हुआ था, भुगतान जो पेपर लगा है उसके आधार पर किया गया है।