कुशीनगर। बुद्ध नगरी में सैलानियों के सत्कार के लिए बने दो अतिथि गृह हस्तांतरण के अभाव में छह साल से शो-पीस बन कर रह गए है। मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म (एमओटी) की ओर से आठ करोड़ की लागत से हाईवे किनारे एनएचएआई की जमीन पर बने दोनों अतिथि गृहों के परिसर में झाड़ियां उग गईं है।
इस्तेमाल न होने की वजह से परिसर में दिन में बच्चे खेलते है और लोग इसे चारागाह के रूप में इस्तेमाल करते है। जबकि रात में नशाखोरों व असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य बौद्ध सैलानियों को सहूलियत देना था, लेकिन सुविधा देना तो दूर करोड़ों रुपये लगाने के बाद भी भवन अब भी वीरान है।
बुद्धिस्ट सैलानियों को जिले में प्रवेश करते ही बेहतर सुविधा और अन्य संसाधनों से आतिथ्य सत्कार किया जाए, इसके लिए वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म की ओर से फोरलेन के किनारे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अतिथि गृह बनाने की परियोजना तैयार की गई। कुशीनगर स्थित बौद्ध परिनिर्वाण स्थली का भ्रमण करने आने वाले विदेशी सैलानियों को सुरक्षित ठहरने व बेहतर गुणवत्तायुक्त खाने-पीने का सामान एक कैंपस में उपलब्ध कराना था। इस योजना के तहत कुशीनगर में आठ करोड़ की लागत से बनाए जाने वाले दो अतिथि गृहों के लिए टेंडर निकाला गया। दिल्ली की एचपीएल कंपनी को इसे बनाने का जिम्मा मिला।
एचपीएल कंपनी से भवन निर्माण सहित अन्य कामों का जिम्मा बिहार के नवादा की एस कंट्रीवाइड कंपनी को सौंपा। कंपनी ने एनएचएआई की जमीन पर नगर पंचायत तमकुहीराज के हरिहरपुर व गाजीपुर बैरियर के समीप हाईवे के दोनों किनारे चार-चार करोड़ की लागत से दो अतिथि गृह बना कर तैयार कर दिए, लेकिन सुस्ती का आलम यह है कि अब तक अतिथि गृहों को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित नहीं कराया जा सका है।
बुद्ध से जुड़े सैलानियों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास : कुशीनगर स्थित बौद्ध परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर से बिहार के गया जाने वाले विदेशी सैलानियों (खासकर बौद्ध पर्यटकों ) को सुरक्षित ठिकाना देने के उद्देश्य से उपर्युक्त दोनों अतिथि गृहों का निर्माण कराया गया है। इसमें सीसी सड़क, एयरकंडीशन विश्रामालय, प्रसाधन, रेस्तरां, चाय-नाश्ता, दैनिक उपयोग के सामान के लिए दुकानें, पार्किंग स्थल आदि की सुविधा उपलब्ध कराना प्रस्तावित है। जरुरी अत्याधुनिक सभी सुविधाओं से लैस अतिथि गृह जिम्मेदारों की उपेक्षाओं का शिकार हो गया है। इसके कारण कुशीनगर से बिहार के गया व बिहार के गया से कुशीनगर आने वाले विदेशी पर्यटक अत्याधुनिक सुविधाओं से वंचित रह जा रहे है। केंद्र सरकार की अत्यंत महत्वकांक्षी योजना में शुमार दोनों अतिथि गृह का निर्माण पूरा होने के बावजूद जिम्मेदार हस्तांतरण करना भूल गए। इसके परिणामस्वरूप दोनों अतिथि गृह के परिसर में झाड़ियां व खर-पतवार उग गए है।