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जिला कारागार का निर्माण शुरू होने में अब सरकारी जमीन बनी रोड़ा

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जिला कारागार का निर्माण शुरू होने में अब सरकारी जमीन बनी रोड़ा
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- सिंचाई, पीडब्ल्यूडी और सीलिंग की जमीन का होना है अधिग्रहण
- शासन स्तर से स्वीकृति मिलने पर आगे बढ़ेगी कार्यवाही
- सभी 327 किसानों से भूमि अधिग्रहण का कार्य हो चुका है पूर्ण
- जिला कारागार देवरिया से पेशी पर आए कैदियों के भागने का रहता है अंदेशा
- कैदियों के परिजनों को भी मिलने के लिए कारागार जाने में होती है परेशानी
राकेश कुमार गौंड़
कुशीनगर। जिला कारागार के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने में अब सरकारी जमीन ही रोड़ा बन गई है। किसानों से 24.66 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित कर शासन को भेज दी गई है, लेकिन प्रस्तावित स्थल पर सिंचाई और पीडब्ल्यूडी की जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। अभी शासन स्तर से इस दिशा में स्वीकृति मिलना बाकी है। तभी जिला कारागार के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। इस वजह से यहां के कैदियों को देवरिया के जिला कारागार में रखा जाता है। उनसे मिलने में न केवल उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि पेशी पर जिला एवं सत्र न्यायालय पर लाए जाने वाले कैदियों के भागने का भी अंदेशा बना रहता है।
13 मई 1994 को देवरिया से पृथक होकर अलग जनपद के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से ही कुशीनगर में जिला कारागार की जरूरत होने लगी, लेकिन 27 साल बाद भी जिला कारागार वजूद में नहीं आ सका है। हालांकि इसके लिए वर्ष 2010 से ही प्रयास चल रहा है। राजस्व विभाग के मुताबिक पडरौना तहसील क्षेत्र के लमुहा गांव में किसानों से 18.333 हेक्टेयर, भटवलिया में 2.172 हेक्टेयर, मजरा केवल छपरा में 3.762 हेक्टेयर और केवल छपरा में किसानों से 0.393 हेक्टेयर सहित कुल 327 किसानों से 24.66 हेक्टेयर जमीन सहमति के आधार पर रजिस्ट्री करा ली गई है। इस मद में शासन की ओर से 462964360.00 रुपये स्वीकृत हो गए थे। जमीन की रजिस्ट्री करने वाले सभी किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है और किसानों के जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूर्ण करा दी गई है। अब जिला कारागार की जमीन के आसपास सिंचाई, पीडब्ल्यूडी और सीलिंग की जमीन है। इसे भी जिला कारागार के नाम हस्तांतरित कराना है। इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से गृह विभाग उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजकर अनुमति मांगी गई थी, लेकिन तीन माह बाद भी सरकारी जमीन के अधिग्रहण के लिए ही जिला प्रशासन को कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। संवाद
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कैदियों के परिजनों को होती है परेशानी
जनपद को वजूद में आए 27 वर्ष गुजर जाने के बाद भी कैदियों के परिजनों की परेशानी दूर नहीं हो पाई है। उन्हें देवरिया जेल में बंद अपने परिवार के कैदियों से मिलने के लिए 55 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इसमें अधिक समय और किराया लगता है।
पेशी पर लाते समय कैदियों के भागने का रहता है अंदेशा
देवरिया जेल से जनपद मुख्यालय रवींद्रनगर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में पेशी पर लाते समय कैदियों के भागने का अंदेशा रहता है। अभी एक अक्तूबर की घटना है। दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट सहित कई आरोपों में जेल भेजा गया प्रमोद यादव निवासी न्यू शिवपुर कॉलोनी थाना रामगढ़ ताल जनपद गोरखपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में पेशी पर लाया गया था। वह न्यायालय परिसर से ही भाग गया था। उस पर पुलिस प्रशासन की तरफ से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। प्रमोद के खिलाफ न्यायालय से भागने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई थीं। उसे स्वॉट टीम और पडरौना कोतवाली की पुलिस ने तीन दिन बाद रवींद्रनगर के पास गिरफ्तार किया था।
भूमि अधिग्रहण के लिए किया गया था प्रयास
जिला कारागार के लिए अपनी जमीन देने वाले भारतीय किसान संघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश मंत्री छोटेलाल सिंह कहते हैं कि इस दिशा में उन्होंने काफी प्रयास किया, जो लोग बाहर थे, उनसे भी संपर्क कर बुलाया गया। पहल कर किसानों से जमीन की रजिस्ट्री कराई गई, लेकिन अब प्रशासन को सरकारी जमीन का अधिग्रहण करना है तो उसमें तत्परता नहीं दिखाई जा रही है।
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जिला कारागार का मामला शासन स्तर पर लंबित है। सिंचाई, पीडब्ल्यूडी और सीलिंग की कुछ जमीन है, जिसे कारागार के नाम होना है। इसके लिए शासन स्तर से अनुमति मिलते ही इन सरकारी जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। तब जिला कारागार के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
एस. राजलिंगम, डीएम
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