जौरा बाजार। क्षेत्र के कनौरा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार की शाम कथावाचक भगवान राम जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है तब भगवान पापियों का नाश कर धर्म की स्थापना के लिए किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं।
कथा वाचक आचार्य पंडित बीरेंद्र तिवारी ने भगवान राम जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि त्रेता युग में जब रावण के अत्याचारों से धरती, देवता और ऋषि-मुनि व्याकुल हो उठे, तब भगवान विष्णु ने अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां राम रूप में अवतार लिए। उन्होंने कहा कि महाराज दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। जिसके फलस्वरूप चैत्र मास की नवमी तिथि, मध्यान्ह काल में कौशल्या जी के गर्भ से भगवान श्रीराम का प्राकट्य हुआ। उन्होंने कहा कि भगवान राम केवल एक राजा या अवतार नहीं, बल्कि मर्यादा, सत्य, कर्तव्य और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। राम जन्म का संदेश है कि धर्म, संयम और त्याग ही जीवन का वास्तविक आधार है।