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गंडक नदी का डिस्चार्ज घटा, घरों की तरफ लौटने लगे लोग
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बाढ़ प्रभावित खड्डा क्षेत्र के गांवों में सामान्य हो रहे हालात
पानी भरे होने की वजह से अभी भी नाव ही आवागमन का माध्यम
गंडक नदी का जलस्तर चेतावनी के बिंदु से अभी भी 72 सेंटीमीटर ऊपर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। गंडक नदी के डिस्चार्ज में अब काफी कमी आ गई है। पानी घटकर अब 1.80 लाख क्यूसेक पर आ गया है। बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे भैसहां गेजस्थल पर नदी का जलस्तर 95.65 रिकॉर्ड किया गया। डिस्चार्ज कम होने से बाढ़ प्रभावित गांवों के अधिकांश घरों से पानी निकल गया है। सड़कों किनारे बने गड्ढे और निचले इलाके में अभी नाव से लोगों को आना-जाना पड़ रहा है। घरों का कीचड़ साफ कर बाढ़ पीड़ित दोबारा संवारने लगे हैं। प्रशासन की तरफ से सामुदायिक किचन अभी भी बाढ़ राहत शिविरों में संचालित किया जा रहा है। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के कई टोलों में लोगों के घरों में घुटने भर बाढ़ का पानी भरा है। विद्यालयों में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण बच्चों को घर रखने के लिए अभिभावकों को ताकीद कर दिया गया है।
गांवों में सुधर रहे हालात
खड्डा। गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज बृहस्पतिवार को कम होकर 180400 क्यूसेक पर आ गया। इससे नदी के जलस्तर में भी कमी आ गई है। नदी के नरम रुख से बाढ़ प्रभावित सात गांवों के हालात में सुधार आने लगा है। शाम चार बजे तक नदी चेतावनी बिंदु से 95.72 मीटर दर्ज किया गया। गंडक नदी में वाल्मीकिनगर बैराज से बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे 180400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दोपहर 12 बजे आंशिक बढ़त के साथ 183400 क्यूसेक हो गया। डिस्चार्ज दो लाख से नीचे होने के चलते बाढ़ प्रभावित हरिहरपुर, नरायनपुर, शिवपुर, बसंतपुर, मरचहवा गांव के अधिकांश घरों से पानी निकल गया है। जिनके घर निचले हिस्से में हैं, उनमें पानी लगा है। बसंतपुर गांव के जवाहिर, कन्हैया, बाबूलाल ने बताया कि घरों से पानी निकल गया है, लेकिन कीचड़ हटाने में परेशानी हो रही है। आठ दिन से बाढ़ ने पूरी गृहस्थी को तहस नहस कर दिया है। कुछ महिलाएं और बच्चे सुरक्षा के चलते सोहगीबरवा पलायन कर गए थे। अब धीरे-धीरे लौट रहे हैं। अभी भी मरचहवा दक्षिण टोले में जाने के लिए लोगों को दो जगह नाव बदलनी पड़ रही है।
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मरचहवा गांव के नरेश, बदरी, झब्बर बताते हैं कि सोहगीबरवा से गांव जाने के लिए पहले बसंतपुर पहुंचते हैं, फिर यहां से दूसरी नाव पर सवार होकर घर जा रहे हैं। पानी गांव के ऊंचे हिस्से से निकलकर निचले हिस्से में चला गया है। पानी तेजी से कम हो रहा है। इन पांच गांवों तक पहुंचने के लिए अभी भी रोहुआ नाला नाव से पार करने की मजबूरी बरकरार है। बाढ़ से प्रभावित रहे सालिकपुर व महदेवा गांव में जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। गांव के आंशिक घरों में ही पानी मौजूद है। ऊंचे हिस्सों में सड़कों से पानी पूरी तरह उतर जाने से आवागमन बहाल हो गया है।
डीह टोले और पिपराघाट के कई टोलों में पानी भरा
तमकुहीरोड। गंडक नदी के डिस्चार्ज में लगातार हो रही गिरावट के बाद गांवों से बाढ़ का पानी अब कम होने लगा है। इसके बावजूद अहिरौलीदान के डीह टोला और पिपराघाट के कई टोलों में अभी भी बाढ़ का पानी भरा है। सड़कों पर घुटनों तक पानी होने से लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गंडक नदी का डिस्चार्ज अब करीब पौने दो लाख क्यूसेक तक पहुंच गया है। इसके बावजूद बिहार बॉर्डर के गंडक नदी के मुहाने पर बसा अहिरौलीदान गांव का डीह टोले में बाढ़ का पानी भरा है। इससे काफी संख्या में लोग प्रभावित हैं। उन्हें पानी के बीच आना जाना पड़ रहा है। इन लोगों का कहना है कि उनके गांव के काफी करीब गंडक नदी आ गई है। इससे उनकी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। यही नहीं उन्हें पानी के साथ बहकर आने वाले जहरीले कीड़े मकोड़ों का भय भी सताने लगा है। इसी तरह पिपराघाट के जिन 14 टोलों में सरकारी नाव की व्यवस्था की गई है, वहां भी बाढ़ का पानी बरकरार है। सड़कों पर काफी जलभराव है। सबसे खराब स्थिति इमिलिया टोला, शिव टोला, चौकी टोला, उपाध्याय टोला और देवनारायन टोला जाने वाली सड़क का है। वहां अभी भी बाढ़ का पानी भरा है। यहां के श्रीकांत सिंह पटेल, शिवपूजन निषाद, राजकुमार, बृजकिशोर साहनी, संजय सिंह, ध्रुव निषाद, विश्वनाथ चौधरी आदि का मानना है कि उनका टोला सर्वाधिक निचले हिस्से में बसा है, जहां से बाढ़ का पानी निकलना मुश्किल है। जब तक गंडक का जलस्तर सामान्य नहीं होगा, तब तक बाढ़ की समस्या से निजात मिलना मुश्किल है।
एसडीएम तमकुहीराज एआर फारुखी का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं के प्रति तहसील प्रशासन गंभीर है। संबंधित गांवों में नावों की व्यवस्था के साथ सभी राजस्वकर्मियों को चौकन्ना रहने का निर्देश दिया गया है।
ठोकरों पर कटान का खतरा बरकरार
तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज लगातार घटने से अब बांध व ठोकरों पर कटान शुरू होने का खतरा मंडराने लगा है। एपी बांध की सुरक्षा के लिए बनाए गए अधिकांश ठोकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में क्षतिग्रस्त ठोकर कभी भी बांध की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। गंडक नदी का डिस्चार्ज घटने से नरवाजोत बांध से लगायत एपी बांध अहिरौलीदान तक बांध व ठोकरों पर कटान शुरू होने का खतरा मंडराने लगा है। लोगों का कहना है कि चैनपट्टी से बिरवट कोंहवलिया के बीच एपी बांध की सुरक्षा के लिए बनाए गए ऐसे 10-15 ठोकर हैं, जो नदी के भारी दबाव के कारण क्षतिग्रस्त होकर अपनी वास्तविक लंबाई खो चुके हैं। इन पर पिछले कई वर्षों से कोई बचाव कार्य नहीं कराया गया है। माना जाता है कि जब नदी के जलस्तर में कमी आती है, उसी समय नदी में बैकरोलिंग शुरू होने से कटान शुरू हो जाता है। यही खतरा अब एपी बांध पर भी दिखाई देने लगा है। क्योंकि तीन दिन पहले ही चैनपट्टी गांव के सामने किलोमीटर 3.000 पर बने ठोकर पर नदी के दबाव के चलते कटान शुरू हो गया था। उसे फ्लड फाइटिंग के जरिए किसी तरह नियंत्रित तो कर लिया गया, किंतु ग्रामीणों की माने तो अभी भी उस ठोकर पर कटान का खतरा बना है।
इसी तरह इसी मानसून सत्र में गंडक नदी नोनियापट्टी गांव के सामने एपी बांध के किलोमीटर 12.860 पर बने ठोकर को तीन बार अपने निशाने पर ले चुकी है और उसे भी हर बार फ्लड फाइटिंग के जरिये किसी तरह बचाया जा सका है। अब उस पर भी गंडक नदी का दबाव बढ़ जाने से कटान का खतरा बना हुआ है। इसी तरह बिनटोली के पास किलोमीटर 1.480 बने ठोकर सहित घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवही दयाल, ततवा टोला और अन्य कई स्थानों पर गंडक नदी के बांध व ठोकर के करीब आकर बहने से कटान का खतरा बना हुआ है। हालांकि बाढ़ खंड के अभियंता लगातार बांध व ठोकरों की निगरानी में जुटे हैं।
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बांध के किनारे बसे मथुरा सिंह, जेपी निषाद, संजय सिंह, बृजकिशोर साहनी, पप्पू सिंह, कुंदन यादव, मुकेश सिंह आदि का कहना है कि वैसे तो ठोकरों का निर्माण बांध की सुरक्षा के लिए होता है। लेकिन रखरखाव न होने से अधिकांश ठोकर क्षतिग्रस्त होकर जर्जर हो चुके हैं। वह कभी भी बांध की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी का कहना है कि बांध के साथ सभी ठोकरों की निगरानी की जा रही है। जहां आवश्यकता होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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