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Kushinagar News: गंडक का डिस्चार्ज 2.15 लाख क्यूसेक तक पहुंचा, तटबंधों पर बढ़ाई निगरानी

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तमकुहीरोड (कुशीनगर)। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद नारायणी (गंडक) नदी का डिस्चार्ज शुक्रवार सुबह 2.15 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। इसके बाद जलप्रवाह में धीरे-धीरे कमी आने लगी। हालांकि नरवाजोत से अहिरौलीदान तक कई स्थानों पर नदी का दबाव बना हुआ है। संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंता दूसरे दिन भी तटबंधों की निगरानी में जुटे रहे। वहीं, जवही दयाल में जलभराव के बीच भी स्लोप पिचिंग का कार्य जारी रहा।
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सेवरही क्षेत्र में गंडक नदी नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब 17.5 किलोमीटर की लंबाई में बहती है। शुक्रवार सुबह नदी का डिस्चार्ज 2.15 लाख क्यूसेक तक पहुंचने के बाद कम होने लगा लेकिन परियोजना स्थलों पर नदी का दबाव बना रहा।
नरवाजोत में किलोमीटर 1.700 स्थित ठोकर, जवही दयाल में कट-इन-वन से कट-इन-टू के बीच, वीरवट, कोन्हवलिया में किलोमीटर 7.200, नोनियापट्टी में किलोमीटर 12.518 और कचहरी टोला में किलोमीटर 14.500 के सामने नदी की तेज धारा बह रही है। हालांकि नदी का बहाव फिलहाल तटबंध से कुछ दूरी पर ठोकरों के आसपास है। इससे किनारों पर बैंक रोलिंग की स्थिति नहीं बनी है।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि नदी का रुख तटबंध की ओर हुआ तो स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। वहीं, तटबंध के किनारे रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि नदी का दबाव अभी कुछ दिनों तक बना रह सकता है। उनका कहना है कि तटबंध के जर्जर और संवेदनशील हिस्सों को समय रहते मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में खतरा बढ़ सकता है।

संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड ने जवही दयाल में एपी तटबंध के किलोमीटर 3.500 से 4.000 के बीच 9.78 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे स्लोप पिचिंग कार्य में तेजी ला दी है। शुक्रवार को भी जलभराव के बीच कार्य जारी रहा।


जवही दयाल में स्लोप पिचिंग का कार्य लगातार कराया जा रहा है। तटबंध के सभी संवेदनशील स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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- दीपरतन सिंह, एसडीओ, बाढ़ खंड
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