बिजली पहुंचाने में रुकावट बना जंगल का कानून
खड्डा (कुशीनगर)। क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को बिजली पहुंचाने में बिहार के वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। जंगल के कानून के नाम पर मात्र 500 मीटर लंबी जमीन पर पोल लगाकर या अंडर ग्राउंड केबिल लगाकर बिजली ले जाने से रोक दिया गया है। बिहार का वन विभाग अगर मानवीय रुख अपना ले तो एक साल से इंतजार कर रही जनता को बिजली मिलने लगेगी। इसे लेकर एक सप्ताह पहले टाइगर रिजर्व में बैठक हुई थी, जिसमें 31 जुलाई को दोनों तरफ के विद्युतकर्मियों से विवादित स्थल की जांच कराने पर सहमति बनी थी।
खड्डा विद्युत उपकेंद्र से तहसील क्षेत्र के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर और निचलौल तहसील के सोहगीबरवां क्षेत्र की जनता को गंडक नदी के दियारा के रास्ते पोल लगाकर लगभग आठ वर्ष से बिजली दी जा रही थी। तीन साल से नदी का रुख पोल वाले क्षेत्रों की ओर मुड़ गया और कटान के जद में दो साल पहले पोल आकर गिर गए। बाद में दूसरी जगह पोल लगाकर बिजली आपूर्र्ति बहाल की गई, लेकिन पिछले वर्ष पुन: नदी ने इस स्थान को काट दिया। इसके बाद से बिजली आपूर्ति ठप है।
क्या है मामला
लगभग पांच सौ मीटर की जमीन खड्डा तहसील क्षेत्र व बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल की सीमा पर है। यहां कटान की वजह से तय नहीं हो पा रहा है कि जमीन किसकी है। बाकी क्षेत्र यूपी में है। यहां पर पोल लगाने में कोई दिक्कत नहीं है। इस पांच सौ मीटर में जब पोल लगने लगा तो बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने कानून का हवाला देते हुए जंगल की जमीन बताकर कार्य रोक दिया।
क्या हो रहे प्रयास
खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी रेता क्षेत्र में बिजली पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं। यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। विद्युत निगम ने पोल लगाने के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारियों से चार माह पहले ही ऑनलाइन आवेदन पत्र भेज दिया था, लेकिन विहार वन प्रशासन ने चुप्पी साध ली। इसके बाद डीएम कुशीनगर एस. राजलिंगम के निर्देश पर एसडीएम खड्डा अरविंद कुमार ने इस मसले के हल के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को पत्र भेजकर बैठक का प्रस्ताव भेजा। बीते 19 फजुलाई को विधायक जटाशंकर त्रिपाठी, एसडीएम अरविंद कुमार, सीओ शिवाजी सिंह, विद्युत निगम के एसी, एक्सईएन, जेई, रेंजर खड्डा सहित राजस्व कर्मचारी बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर वन विश्रामालय पहुंचे थे। वहां पर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एसीएफ (सहायक वन संरक्षक) अमिता राज व वन कर्मचारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों में वार्ता हुई थी। एसीएफ ने वाइल्ड लाइफ कानून का हवाला देते हुए वन सीमा में किसी भी कार्य की अनुमति न देने की बात कही। लगभग डेढ घंटे तक चली वार्ता में यह तय हुआ कि पहले उस विवादित स्थल की संयुक्तरूप से अभिलेखीय व स्थलीय जांच कर स्थिति स्पष्ट कर ली जाए कि वह क्षेत्र किसके अधीन है।
31 को होगी जमीन की पैमाइश
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की सहायक वन संरक्षक अमिता राज ने एसडीएम खड्डा को भेजे पत्र में 31 जुलाई का समय निर्धारित किया है। खड्डा क्षेत्र के राजस्व कर्मचारियों व अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। दोनों तरफ के कर्मचारी यह जांच करेंगे कि वह जमीन किसकी है।