जानकारी के अनुसार, माघी मठिया गांव के दिव्यांग शेर मोहम्मद ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बुधवार को दोपहर में उनके परिवार के सभी लोग सो रहे थे। तभी उनके घर के सामने स्थित नबीहसन की झोपड़ी में किसी वजह से आग लग गई। तेज धूप और पछुआ हवा चलने के कारण शेर मोहम्मद का घर भी आग की चपेट में आ गया।
घर के सामने स्थित झोपड़ी में आग लगने के बाद शेर मोहम्मद के बच्चे पत्नी और बुजुर्ग दादा-दादी पक्के मकान में छिपने चले गए। एक कमरे में शेर मोहम्मद की पत्नी और चारों बेटियां थीं, तो दूसरे में बेटी कुलसुम छिपी थी। लेकिन आग की लपटों ने पक्के मकान को भी जद में ले लिया। जिस कमरे में पत्नी और बेटियां छिपी थीं, उसमें सामान अधिक होने के कारण आग पूरे कमरे में फैल गई, जिससे पांचों एक ही जगह जिंदा जल गईं। दूसरे कमरे में मौजूद शेर मोहम्मद के दादा-दादी और एक बेटी गंभीर रूप से झुलस गए हैं। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना के वक्त शेर मोहम्मद ऑटो लेकर पडरौना गए थे। आग लगने की जानकारी होते ही वह बदहवास स्थिति में घर पहुंचे। घटना में शेर मोहम्मद की 32 वर्षीय पत्नी फातिमा, छह वर्ष की पुत्री रोकई, तीन साल की अमीना, डेढ़ साल की आयशा और दो माह की दुधमुंही खतीजा जिंदा जल गईं। शेर मोहम्मद के दादा 90 वर्षीय सफीद, 85 वर्षीय दादी मोतीरानी और छह साल की बेटी कुलसुम गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
आग लगने के बाद करीब चार घंटे तक गांव में अफरातफरी रही। अग्निशमन दस्ता सूचना देने के बावजूद करीब दो घंटे देरी से पहुंचा। डीएम रमेश रंजन, एसपी धवल जायसवाल, एडीएम देवीदयाल वर्मा, एसडीएम सदर महात्मा सिंह, सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया सहित कई अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे।
एसपी धवल जायसवाल ने बताया कि पुलिस प्रशासन की तरफ से मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य किया गया। मरने वाली महिला दिव्यांग थी। सभी आग में घिर गईं थीं। इसलिए महिला न खुद बच सकी न बेटियों को बचा पाई। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। डीएम रमेश रंजन का कहना था कि आग अज्ञात कारण से लगी है। पीड़ित परिवार को आपदा राहत कोष से मदद दिलाई जाएगी।