पांच साल में सेवायोजन विभाग ने दिलाए 6,500 युवाओं को रोजगार
सेवायोजन विभाग के पोर्टल पर 34,621 युवाओं का हुआ है पंजीकरण
पडरौना (कुशीनगर)। सेवायोजन विभाग की ओर से निजी क्षेत्रों में पांच साल में जिले के 6,543 युवाओं को रोजगार मिल सका है। बेरोजगार युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे युवाओं में निराशा है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल आबादी 34 लाख 64 हजार 544 है। इसमें सात लाख 65 हजार 701 युवा हैं। हर साल युवाओं की तादाद बढ़ती जा रही है। बेरोजगारी के कारण अधिकतर युवा जिला व राज्य छोड़कर रोजगार की तलाश में घूम रहे हैं। कोरोना महामारी में कुछ युवाओं की नौकरी भी छूट गई। युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए सेवायोजन विभाग एक वर्ष में चार बार रोजगार मेला लगवाता है। सेवायोजन विभाग के पोर्टल पर 34,621 युवाओं का पंजीकरण है। इसमें पुरुष 27,524 और महिलाएं 7,097 हैं।
हाईस्कूल से कम 1,459, हाईस्कूल 6,424, इंटर 12,351, स्नातक 11,887, स्नाकोत्तर 2,500, आईटीआई 1,079, डिप्लोमा यांत्रिक 2,217, स्नातकोत्तर इंजीनियरिंग 810, चिकित्सा दो, बीटीसी 12, बीएड एलटी 793, एमएड में छह युवाओं ने रोजगार पाने के लिए सेवायोजन विभाग के पोर्टल पर पंजीयन कराया है। सेवायोजन विभाग के पोर्टल पर वर्ष 2016 तक 15,886 युवाओं ने पंजीयन कराया था। उसके बाद 2017 वर्ष में 4,014 वर्ष 2018 में 4,086, वर्ष 2019 में 5,778, वर्ष 2020 में 4,174, वर्ष 2021 में 5,289 युवाओं ने पंजीयन कराया है। आंकड़ों पर गौर करें तो अधिक पंजीयन वर्ष 2019 में हुआ है।
वर्षवार युवाओं को मिला रोजगार
वर्ष- रोजगार
2017-123
2018-1,157
2019-2,075
2020-2,169
2021-1019
पोर्टल पर तीन वर्ष तक रहता है पंजीयन
जिला सेवायोजन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि सेवायोजन के पोर्टल पर पंजीयन तीन वर्ष तक ही रहता है। उसके बाद पुन: नवीनीकरण कराना अनिवार्य है।
अनुदेशकों का पद खाली, युवाओं का प्रशिक्षण प्रभावित
जिला मुख्यालय स्थित सेवायोजन कार्यालय अनुदेशकों की कमी का दंश झेल रहा है। बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलाने की मंशा से सृजित किया गया यह विभाग शासन की उपेक्षा का शिकार है। यहां पर आशुलिपिक, भाषा, सचिव पद्धति पद पर तीन अनुदेशकों की स्वीकृति है। यह तीनों पद एक साल से खाली हैं। इससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के युवाओं का प्रशिक्षण पूरी तरह ठप है। युवाओं का कहना है कि सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण कराने का कोई मतलब ही नहीं रह गया है। प्रदेश सरकार की ओर से बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार योग्य बनाने के लिए प्रत्येक जिले में सेवायोजन कार्यालय स्थापित किया गया है। शासन की ओर से चलाई जा रही रोजगार से जुड़ी कई योजनाओं का संचालन इस विभाग की ओर से किया जाता है, लेकिन यहां अनुदेशकों की कमी के चलते प्रशिक्षण बाधित चल रहा है।
एक वर्ष का होता है कोर्स
सेवायोजन विभाग में शिक्षण एवं मार्गदर्शन केंद्र की तरफ से कार्यालय प्रबंध एवं प्रशिक्षण का कोर्स कराया जाता है। यह कोर्स एक वर्ष में पूरा हो जाता है। एक अप्रैल से कोर्स शुरू होता है और 31 मार्च को समापन होता है। कार्यालय प्रबंध एवं प्रशिक्षण कोर्स में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ी जाति के युवाओं का ही नामांकन होता है। इसके लिए 30 सीटें स्वीकृत हैं। इसमें अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति 22, पिछड़ी के आठ युवा नामांकन करा सकते हैं। एक साल के कोर्स में सरकार की ओर से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के युवा को प्रतिमाह 200 रुपये छात्रवृत्ति दी जाती है।
वर्जन
सेवायोजन विभाग के पोर्टल पर जितने भी युवा पंजीयन कराए हैं, संबंधित कोर्स के युवा को रोजगार मेला लगने पर उनके दिए हुए मोबाइल फोन नंबर पर टेक्स्ट संदेश भेजकर अवगत करा दिया जाता है। जिले में अनुदेशक के तीन पद स्वीकृत हैं, जो बीते एक साल से खाली चल रहे हैं। इससे कोर्स में नामांकन नहीं किया जा रहा है। शासन को अनुदेशकों की मांग के लिए पत्र लिख दिया गया है।
संजय कुमार, जिला सेवायोजन अधिकारी
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